Expose Now स्पेशल न्यूज पार्ट-2(स्टोरी-3) बांसवाड़ा के गढ़ी की रेट कॉन्ट्रैक्ट निविदा के सोलर पैनल्स कार्य में 2.66 करोड़ का उठाया फर्जी भुगतान

-मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने PHED इंजीनियर्स की मिलीभगत से योजना में 25 करोड़ से ज्यादा का किया फर्जीवाड़ा

जयपुर। भ्रष्टाचार के खिलाफ Expose Now की मुहिम के इस तीसरे भाग में हम उजागर कर रहे हैं। गढ़ी की रेट कॉन्ट्रैक्ट (RC) निविदा में फर्म मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने PHED इंजीनियर्स के साथ मिलकर 25 करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार किया है। Expose Now की स्पेशल खुलासे पार्ट-2 की स्टोरी-1 और स्टोरी-2 में हमने योजना की पाइप लाइनों व ट्यूबवैलों के कार्य में किए गए करोड़ों के फर्जीवाड़ा का खुलासा किया था। स्टोरी-3 में हम खुलासा कर रहे हैं कि कैसे फर्म ने विभागीय इंजीनियर्स के साथ मिलकर ग्रिड सोलर पैनल्स के सप्लाई, इंस्टालेशन, टेस्टिंग, पाइप लाइन लेइंग और सीसी रोड रिपेयरिंग के कार्य में करोड़ों का फर्जीवाड़ा किया है।

सोलर पैनल्स और इन्वर्टर में 2.66 करोड़ का फर्जी भुगतान:-

जल जीवन मिशन के अंतर्गत गढ़ी के Khatwara और Bakawara योजनाओं में निरीक्षण के दौरान पाया गया कि वहां कोई भी ऑन-ग्रिड सोलर इन्वर्टर स्थापित नहीं था। सोलर पैनल्स के सफल संचालन के लिए कुल 451,520 वाट क्षमता के बराबर इन्वर्टर स्थापित किए जाने चाहिए थे,लेकिन मौके पर जांच के दौरान केवल 120 किलोवाट के इन्वर्टर ही मिले। इन इन्वर्टर की इनवॉइस की तारीखें 28 मई, 2024 और 30 जून 2024 की थी, जबकि इससे पहले ही 11वें रनिंग बिल में इनका 100 फीसदी भुगतान कर दिया गया था। इसके साथ ही, BOQ में शामिल न होने के बावजूद नॉन-BSR आइटम्स, जैसे कि 4 मीटर ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाने के लिए 48,098 kg का स्ट्रक्चर (मूल्य 41,36,436 रुपये) और अन्य कार्य, बिना सक्षम स्वीकृति के ही किए गए और भुगतान उठाए गए।

पाइप लाइन Laying कार्य में निर्धारित मापदंडों से अधिक का भुगतान:-

तीसरे रनिंग बिल की रिकॉर्ड एंट्री और माप पुस्तिका (MB) संख्या 1821 की जांच में पाया गया कि कनिष्ठ अभियंता द्वारा पाइप की खुदाई कार्य की चौड़ाई (width) निर्धारित मापदंडों से अधिक ली गई है। निविदा शर्तों के अनुसार, पाइपलाइन की खुदाई ‘IS 12288’ के अनुसार होनी चाहिए। माप पुस्तिका में खुदाई की लंबाई, चौड़ाई और गहराई का विस्तृत इंद्राज सही से अंकित नहीं है। उदाहरण के लिए, Khatwara और Mohan Singh Gara में HDPE 75MM PIPE की खुदाई के लिए जहां 60 cm (या OD + 300mm) होनी चाहिए, वहीं इससे अधिक चौड़ाई का उपयोग करके 950 MTR और 3887 MTR के कार्य में इंजीनियर्स ने मिलीभगत से फर्म मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल को लाखों रूपए का फर्जी भुगतान कर दिया गया।

सीसी रोड डिसमेटलिंग से अधिक सीसी रिपेयरिंग का भुगतान:-

माप पुस्तिकाओं की जांच से पता चला है कि पाइपलाइन बिछाने के समय की गई सीसी रोड कटिंग और रिपेयरिंग के माप में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया। विभागीय इंजीनियर्स ने सीसी रोड डिसमेटलिंग (C C dismantling) को अधिकांशतया माप पुस्तिका में 10 cm दिखाया गया है। इसके विपरीत, सीसी रोड रिपेयरिंग में पीसीसी (PCC M10) और सीसी (M20) का भुगतान 10 cm से लेकर 25 cm तक (11वें रनिंग बिल तक) उठाया गया है। 11वें रनिंग बिल तक 20,047 cum डिसमेटलिंग के मुकाबले 10,998 cum (PCC M10) और 14,045 cum (CC M20) का भुगतान किया गया है। जबकि वास्तविकता में अधिकांश जगह सीसी रोड कटिंग की रिपेयरिंग हुई ही नहीं, वहां आत भी गड्ढ़े पड़े हुए हैं। वहीं कई स्थानों पर सीसी रोड कटिंग का कार्य हुआ ही नहीं था, फिर भी एमबी में रिपेयरिंग वर्क दिखाकर लाखों का फर्जी भुगतान कर दिया गया।

आखिर कब तक होगी जिम्मेदारों पर कार्रवाई?

इस महाघोटाले और फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक उदयपुर संभाग में भ्रष्टाचार का यह खेल चलता रहेगा? गढ़ी की रेट कॉन्ट्रैक्ट (RC) निविदा में मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल को विभाग के आलाधिकारियों और मंत्री कार्यालय द्वारा लगातार डेढ़ साल से बचाया जा रहा है।जब विभागीय जांचों में यह साफ हो चुका है कि पाइपलाइन, सीसी रोड रिपेयरिंग और सोलर पैनल्स के नाम पर 2 से 3 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है, तो फिर दोषियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

Expose Now की यह मुहिम तब तक जारी रहेगी जब तक जनता के पैसे की इस खुली लूट के दोषियों को उनके अंजाम तक नहीं पहुँचाया जाता।

Share This Article
Leave a Comment