बजट पूर्व बैठक: मुख्य सचिव ने बैंकों को दिए निर्देश— ‘लोन स्वीकृति और वितरण के अंतर को मिटाएं, युवाओं और छोटे उद्यमियों को दें प्राथमिकता’

जयपुर, राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा है कि बैंकिंग क्षेत्र राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास की रीढ़ है। बुधवार को शासन सचिवालय में स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (SLBC) के साथ आयोजित प्री-बजट बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने बैंकों को ऋण वितरण प्रक्रिया में तेजी लाने और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के कड़े निर्देश दिए।

विकसित राजस्थान@2047 के लक्ष्य पर फोकस

मुख्य सचिव ने बैंक प्रतिनिधियों से कहा कि एमएसएमई (MSME), महिला उद्यमिता, और राजीविका जैसी योजनाओं में स्वीकृत लोन और वास्तविक वितरण के बीच जो अंतर (Gap) है, उसे तत्काल खत्म किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत@2047’ और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ‘विकसित राजस्थान@2047’ के विजन को तभी पूरा किया जा सकता है जब बैंकिंग सेवाएं अंतिम छोर तक सुलभ हों।

‘राइजिंग राजस्थान’ से पैदा हुए नए अवसर

बैठक में बताया गया कि ‘राइजिंग राजस्थान’ समिट के तहत प्रदेश में 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है। मुख्य सचिव ने कहा कि इस बड़े निवेश के कारण बैंकों के पास ऋण सुविधाओं के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बैंकों को कम राशि के लोन (Small Ticket Loans) को ‘फास्ट ट्रैक’ पर लाने को कहा ताकि युवाओं के स्वरोजगार के सपने पूरे हो सकें।

प्रमुख विभागीय निर्देश:

  • उद्योग एवं एमएसएमई: अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल ने बताया कि ‘पंच गौरव योजना’ के तहत 41 जिलों के 41 उत्पादों (One District One Product) के प्रसंस्करण और विपणन के लिए ऋण की बड़ी संभावनाएं हैं।
  • वित्त (बजट): शासन सचिव राजन विशाल ने बैंकों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और ‘की-परफॉर्मेंस इंडीकेटर्स’ (KPI) के आधार पर बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करने का सुझाव दिया।
  • राजीविका: स्टेट मिशन निदेशक नेहा गिरि ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं के लोन आवेदनों की पेंडेंसी कम करने और आरबीआई गाइडलाइन के अनुरूप लोन साइज रखने के निर्देश दिए।

शीर्ष बैंकों की सहभागिता

बैठक में बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा राजस्थान में बैंकिंग ढांचे और विस्तार की रणनीति पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस दौरान आरबीआई, नाबार्ड, एसबीआई, पीएनबी, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई सहित सभी प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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