जयपुर: चर्चित जल जीवन मिशन (JJM) के तहत बिना प्रशासनिक स्वीकृति के करोड़ों रुपए के कार्य कराने और भुगतान करने के गंभीर मामले में 10 आरोपी अधिकारियों और इंजीनियरों को क्लीनचिट दे दी गई है। इन सभी को दोषमुक्त बताने वाले अधीक्षण अभियंता (SE) रमेश सैनी के खिलाफ भी अब सरकार के स्तर पर जांच चल रही है।
यह है पूरा मामला
सरकार के आदेश पर अलवर जिले में खंड एनसीआर द्वितीय में जल जीवन मिशन के तहत मरम्मत मद 2215 में बिना सक्षम स्वीकृति के कार्य कराने, नलकूपों की गहराई व हैंडपंपों के प्लेटफॉर्म की मनमर्जी से स्वीकृति जारी करने के मामले की जांच चल रही थी। नियमों के अनुसार रखरखाव मद में अधिकतम 5 से 7 लाख रुपए के मरम्मत के काम किए जा सकते हैं, लेकिन शिकायतों के कई प्रकरणों में 30 से 40 लाख रुपए तक के काम बिना सक्षम स्वीकृति के कराए गए थे।
किस सर्किल में कितना बिना काम किया गया भुगतान:
- अलवर एनसीआर: 3 करोड़ रुपए
- जयपुर जिला: 10 करोड़ रुपए
- कोटपूतली-बहरोड़: 14 करोड़ रुपए
- दौसा: 19 करोड़ रुपए
- नीमकाथाना: 2.50 करोड़ रुपए
- झुंझुनूं: 2.50 करोड़ रुपए
एसई की रिपोर्ट को बनाया आधार
विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, एसई रमेश सैनी ने जनवरी से जून 2026 के बीच सभी 10 अधिकारियों के संबंध में अलग-अलग पत्र अतिरिक्त मुख्य अभियंता भवानी सिंह शेखावत को भेजे। इन प्रतिवेदनों में संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण, दस्तावेजों व साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए उन्हें दोषमुक्त करने की अनुशंसा की गई। इसके बाद अतिरिक्त मुख्य अभियंता (PHED एनसीआर अलवर) भवानी सिंह शेखावत ने एसई की रिपोर्ट को आधार मानते हुए मुख्य अभियंता (गुणवत्ता नियंत्रण) जयपुर को प्रस्ताव भेजा और लिखा कि वे एसई की रिपोर्ट से सहमत हैं।
सरकार के पास पहुंची थीं 200 शिकायतें
प्रदेशभर में इस घोटाले को लेकर 200 से अधिक शिकायतें मिली थीं, जिनमें 145 शिकायतें सांसदों, विधायकों व अन्य जनप्रतिनिधियों की थीं। 25 मामले स्वप्रेरणा के रहे और 30 मामले मीडिया के जरिए सामने आए। विभाग की ओर से करीब 160 मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है, जबकि शेष की जांच अभी चल रही है। कार्रवाई के नाम पर अब तक विभाग द्वारा 16 सीसीए की चार्जशीट 86 लोगों को दी गई है और 17 सीसीए की चार्जशीट 50 इंजीनियरों को दी गई है, जबकि प्रशासनिक विभाग ने 52 लोगों को चार्जशीट दी है।