जयपुर/नई दिल्ली: राजस्थान में 1 जून 2026 से होने वाली पेट्रोल पंप डीलर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल के ऐलान के बाद उपभोक्ताओं में ईंधन संकट की आशंकाएं गहराने लगी हैं। इसी बीच, केंद्र सरकार ने मामले में दखल देते हुए स्थिति को पूरी तरह साफ कर दिया है। भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और तेल संकट की खबरें महज अफवाह हैं।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी खुद स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। केंद्र ने राज्यों को अनधिकृत भंडारण और ईंधन के डायवर्जन (कालाबाजारी) के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
सप्लाई की कोई समस्या नहीं, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर
केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर देश है। देश की 22 चालू रिफाइनरियों की कुल वार्षिक क्षमता 25.81 करोड़ टन है, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में घरेलू खपत 24.32 करोड़ टन थी, जो उत्पादन क्षमता से कम है। इसके अलावा, भारत ने 6.15 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी किया है। पेट्रोलियम सचिव ने फिक्की (FICCI), सीआईआई (CII) और राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक के बाद साफ किया कि जमीनी स्तर पर किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी नहीं है।
क्या है तेल संकट का भ्रम और ‘आर्बिट्राज’ का खेल?
सरकार के विश्लेषण में सामने आया है कि राजस्थान समेत कुछ हिस्सों में ‘आर्बिट्राज’ (मूल्य अंतर का फायदा उठाने) का पैटर्न देखा जा रहा है। आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां (PSUs) प्रतिदिन करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। लेकिन, निजी तेल कंपनियों द्वारा कीमतें बढ़ाए जाने से उनके ग्राहकों (थोक और खुदरा) ने हाई-स्पीड डीजल (HSD) की खरीद में 38% की कटौती की है और अब वे सरकारी पंपों की तरफ रुख कर रहे हैं। इससे सरकारी पंपों पर अप्रत्याशित भीड़ बढ़ गई है।
औद्योगिक उपभोक्ताओं की चालाकी पर सरकार सख्त
औद्योगिक उपभोक्ता अपने तय चैनल से महंगा ईंधन खरीदने के बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों से आम जनता के लिए सब्सिडी वाला ईंधन खरीद रहे हैं। इससे पीएसयू के थोक ग्राहकों के वॉल्यूम में 29% की गिरावट आई है। यह आम नागरिकों के अधिकारों का हनन है। इसके चलते खुदरा पंपों पर मांग एक जगह केंद्रित हो गई है, जिससे ईंधन खत्म होने जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है।
‘स्पेशल स्क्वॉड’ करेगा जमाखोरों पर कार्रवाई

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने राजस्थान समेत सभी राज्यों से तुरंत ‘स्पेशल स्क्वॉड’ (विशेष दस्ते) गठित करने का अनुरोध किया है। ये दस्ते थोक उपभोक्ताओं, जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों की जांच करेंगे। आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत ऐसे लोगों और संस्थानों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की अपील: अफवाहों से बचें
भारत सरकार ने राजस्थान की जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया की अफवाहों पर ध्यान न दें। बाजार में सप्लाई की कोई समस्या नहीं है। आम उपभोक्ताओं से अनुरोध किया गया है कि वे पैनिक बाइंग से बचें ताकि वितरण नेटवर्क सुचारू रूप से चलता रहे।

इधर, 1 जून से आर-पार की लड़ाई का ऐलान
दूसरी तरफ, राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (RPDA) ने राज्य सरकार और तेल कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र सिंह भाटी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि यदि उनकी लंबित विधिक और व्यावहारिक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो 1 जून 2026 से प्रदेश भर के पेट्रोल पंप अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। इस अल्टीमेटम से प्रशासनिक हल्कों में हड़कंप मच गया है।