जयपुर/जैसलमेर (11 जून 2026)। शिक्षा विभाग में अपनी पहचान छिपाकर और नाम-जन्म तिथि बदलकर वर्षों से फर्जीवाड़ा कर रहे DIET जैसलमेर के प्रधानाचार्य रामकुमार के खिलाफ आखिरकार शासन ने बड़ा एक्शन लिया है। ‘EXPOSE NOW’ द्वारा 20 अप्रैल 2026 को ‘एक प्रिंसिपल के अनेक चेहरे! जालसाजी या गहरी साजिश?’ शीर्षक से इस पूरे फर्जीवाड़े का महा-खुलासा किए जाने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया था। हमारी बेबाक खबर का संज्ञान लेते हुए शिक्षा (ग्रुप-2) विभाग ने कड़ा कदम उठाया है और आरोपी प्रिंसिपल रामकुमार को तत्काल प्रभाव से पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा (APO) में डाल दिया है।
जैसलमेर से हटाकर झालावाड़ किया मुख्यालय

शिक्षा विभाग के वरिष्ठ शासन उप सचिव के. आर. मीना द्वारा गुरुवार (11 जून 2026) को जारी आदेश (क्रमांकः प.2 (1) शिक्षा-2/2025-26345 पार्ट 2) के अनुसार सख्त कार्रवाई की गई है:
- APO के आदेश: डाइट जैसलमेर के प्रधानाचार्य रामकुमार को ‘प्रशासनिक कारणों’ का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से आगामी आदेशों तक APO कर दिया गया है ।
- मुख्यालय बदला: इस अवधि के दौरान उनका नया मुख्यालय जैसलमेर से सैकड़ों किलोमीटर दूर “कार्यालय मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, समग्र शिक्षा, झालावाड़” निर्धारित किया गया है ।
- विभाग की इस कार्रवाई को जांच को निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ाने और आरोपी को पद के प्रभाव से दूर करने के रूप में देखा जा रहा है।
EXPOSE NOW ने किया था खुलासा
गौरतलब है कि EXPOSE NOW ने विस्तृत दस्तावेजों के साथ इस जालसाजी का कच्चा चिट्ठा खोला था। शिकायतकर्ता द्वारा SOG और उच्चाधिकारियों को दी गई शिकायत के आधार पर ये प्रमुख खुलासे हुए थे:
- दो जन्म तिथियां और हस्ताक्षर: राजकाज पोर्टल पर 2016 में जन्म तिथि 05.12.1958 और 2017 में 01.10.1966 दर्ज पाई गई थी, साथ ही हस्ताक्षर भी अलग-अलग थे।
- निविदाओं में छद्म नाम: SPPP पोर्टल पर ‘रामकुमार’ की जगह ‘राम सिंह’ के नाम से निविदाएं प्रकाशित की गईं।
- नामों का ‘कॉकटेल’: वरिष्ठता सूची, न्यायालय की याचिकाओं और ई-पत्रिकाओं में रामकुमार, RAMKUMAR SINGH और आर.के. सिंह जैसे अलग-अलग नामों का इस्तेमाल किया गया।
- रिटायरमेंट का खेल: 30 सितंबर 2026 को होने वाली सेवानिवृत्ति से पहले पेंशन लाभ लेने के लिए दस्तावेजों में चालाकी से संशोधन करने के गंभीर आरोप लगे थे।
क्या अब SOG कसेगी शिकंजा?
EXPOSE NOW की खबर के बाद शिक्षा विभाग ने रामकुमार को APO कर पहला कड़ा संदेश दे दिया है और जांच को ठंडे बस्ते से बाहर निकाल लिया है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दस्तावेजों में इतनी भारी हेराफेरी और ‘बहुरूपी’ खेल को लेकर क्या स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) कोई FIR दर्ज करेगा? क्या सेवानिवृत्ति से पहले आरोपी अधिकारी पर कानूनी शिकंजा कसेगा?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now