करौली। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (जयपुर) के निर्देशानुसार और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (करौली) के अध्यक्ष के मार्गदर्शन में शुक्रवार (29 मई) को सपोटरा स्थित एक वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश प्रताप सिंह मीना ने राज फाउण्डेशन संस्थान द्वारा संचालित इस वृद्धाश्रम का दौरा किया, जहां कई तरह की गंभीर अनियमितताएं और अव्यवस्थाएं सामने आईं।
कर्मचारियों का कोई रिकॉर्ड नहीं, जवाब देने में रहे नाकाम
निरीक्षण के दौरान वृद्धाश्रम की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। मौके पर केवल 05 कर्मचारी ही उपस्थित पाए गए। जब प्राधिकरण सचिव ने कर्मचारियों की उपस्थिति जांचने के लिए रजिस्टर मांगा, तो आश्रम का स्टाफ कोई भी रजिस्टर या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवा सका। कर्मचारियों के पास इस लापरवाही का कोई संतोषजनक जवाब भी नहीं था।
कागजों में 19 बुजुर्ग मौजूद, हकीकत में मिले सिर्फ 5

वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों की संख्या और उपस्थिति को लेकर भी बड़ा झोल सामने आया।
- रजिस्टर का आंकड़ा: वृद्धजन उपस्थिति रजिस्टर की जांच करने पर उसमें कुल 25 बुजुर्गों के नाम दर्ज मिले। शुक्रवार के दिन रजिस्टर में 06 वृद्धजनों को अनुपस्थित और 19 को उपस्थित दर्शाया गया था।
- हकीकत: जब सचिव ने मौके पर मुआयना किया तो वृद्धाश्रम में केवल 05 वरिष्ठ नागरिक ही निवासरत पाए गए। जब इस भारी अंतर के बारे में पूछा गया, तो आश्रम प्रबंधन ने बहाना बनाते हुए कहा कि कुछ बुजुर्ग ‘कथा’ सुनने गए हैं और कुछ अपना ईलाज करवाने के लिए बाहर गए हुए हैं।
रसोई और शौचालयों में गंदगी का अंबार
वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के साथ भी खिलवाड़ होता मिला।
- रसोई की बदहाली: रसोईघर में साफ-सफाई का घोर अभाव था। खाद्य सामग्री जैसे चीनी, चायपत्ती और नमक को सुरक्षित रखने के बजाय खुले डिब्बों में रखा गया था, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है।
- शौचालय और स्नानागार: निरीक्षण के दौरान आश्रम के शौचालय और बाथरूम (स्नानागार) भी बेहद गंदे और बदबूदार पाए गए।
हालांकि, मौके पर मौजूद वृद्धजनों से जब सचिव प्रताप सिंह मीना ने बातचीत की, तो उन्होंने भोजन की गुणवत्ता को संतोषजनक बताया।
कमियों पर लगाई फटकार, दिए सुधार के निर्देश
वृद्धाश्रम में पाई गई इन तमाम कमियों, साफ-सफाई के अभाव और रिकॉर्ड में लापरवाही को लेकर सचिव प्रताप सिंह मीना ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने आश्रम प्रबंधन और उपस्थित कर्मचारियों को व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार करने और भविष्य में ऐसी कोताही न बरतने के सख्त दिशा-निर्देश प्रदान किए हैं।
