बीकानेर में ACB का बड़ा एक्शन: चोरी के माल और मुल्जिमों की लोकेशन निकालने के नाम पर घूस ले रहे बज्जू थाने के ASI धर्मवीर यादव नामजद

बीकानेर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की बीकानेर चौकी ने पुलिस महकमे में चल रहे भ्रष्टाचार और पीड़ित जनता को ब्लैकमेल करने के गंभीर मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई की है । एसीबी ने बीकानेर के बज्जू पुलिस थाने में तैनात रहे तत्कालीन सहायक उप निरीक्षक (ASI) धर्मवीर यादव के खिलाफ पीड़ित दुकानदार से उसके चोरी के मुकदमे में मदद करने की एवज में रिश्वत वसूलने का संगीन मामला दर्ज किया है । शातिर अधिकारी ने पीड़ित से चतुराईपूर्ण तरीके से आंशिक रिश्वत राशि भी ले ली थी

ज्वैलरी की दुकान में हुई थी लाखों की चोरी, ASI ने मांगी घूस

यह मामला कोलायत के उपरला बास निवासी परिवादी छगनलाल सोनी से जुड़ा है, जिनकी बज्जू तहसील के भलूरी गांव में ‘आशापुरा ज्वैलर्स’ नाम से सोने-चांदी के आभूषणों की दुकान है । 24 जनवरी 2026 को उनकी दुकान में ₹4-5 लाख के आभूषण चोरी होने की घटना पर बज्जू थाने में एक मुकदमा संख्या 16/2026 दर्ज हुआ था । इस मुकदमे की जांच एएसआई धर्मवीर यादव कर रहे थे

जब परिवादी 27 फरवरी 2026 को मुकदमे और मुल्जिमों की प्रगति के बारे में जानकारी लेने थाने पहुंचा, तो जांच अधिकारी धर्मवीर यादव ने अज्ञात चोरों की मोबाइल लोकेशन पता करने और चोरी का सामान बरामद कराने के नाम पर ₹10,000 की रिश्वत मांग ली

पहले सत्यापन में डरा-धमकाकर ले लिए ₹1,500

पीड़ित दुकानदार पहले ही चोरी के कारण भारी आर्थिक नुकसान झेल रहा था, इसलिए उसने घूस न देकर 28 फरवरी 2026 को एसीबी चौकी बीकानेर में शिकायत दर्ज कराई । एसीबी के पुलिस निरीक्षक आनंद मिश्रा के निर्देशन में कांस्टेबल अनिल कुमार को रिश्वत मांग के सत्यापन के लिए नियुक्त किया गया

1 मार्च 2026 को सत्यापन के दौरान परिवादी को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर (डीवीआर) देकर थाने भेजा गया । वहां एएसआई धर्मवीर यादव ने अत्यंत चतुराईपूर्ण वार्तालाप करते हुए परिवादी को मानसिक दबाव में लिया । परिवादी ने जब रिश्वत की रकम के बारे में बार-बार पूछना चाहा, तो आरोपी गुस्सा हो गया और टोकते हुए बोला— “मैंने पहले बताया तो था, तूं मिनट-मिनट में मेरे से क्यूं सुनना चाहता है।” इस घबराहट और दबाव में परिवादी ने अपने पास से ₹1,500 की आंशिक रिश्वत राशि तुरंत एएसआई को सौंप दी । आरोपी ने पैसे रख लिए और बाकी की रकम बाद में लाने और सोमवार तक काम करने का आश्वासन देकर सांकेतिक रूप से विदा किया

शक होने पर डॉक्टर और पुलिसकर्मी की तरह खेला ‘माइंड गेम’, ट्रैप रहा असफल

एसीबी ने शेष ₹8,500 की घूस राशि की रिकवरी के लिए 11 मार्च 2026 को स्वतंत्र गवाहों (अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी रामेश्वर लाल और कनिष्ठ सहायक जय सिंह) की मौजूदगी में ट्रैप का जाल बिछाया । केमिकल पाउडर लगे नोट देकर परिवादी को भेजा गया

परंतु, बार-बार कॉल किए जाने के कारण शातिर एएसआई धर्मवीर यादव को परिवादी पर शक हो गया था । 11 मार्च को जब परिवादी थाने पहुंचा तो एएसआई ने खुद को बीकानेर शहर में होना बताया और मिलने से टालमटोल कर दी । इसके बाद वह लगातार परिवादी के व्हाट्सएप कॉल्स को नजरअंदाज करने लगा । चूंकि आरोपी को एसीबी की भनक लग चुकी थी, इसलिए रंगे हाथों पकड़ने (ट्रैप) की यह आकस्मिक कार्रवाई असफल हो गई और परिवादी को स्वतंत्र गवाहों के समक्ष उसकी असली ₹8,500 की राशि वापस सुरक्षित सौंप दी गई।

पढ़े पूरी FIR..

कार्रवाई के बीच ही एएसआई का हुआ ट्रांसफर

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ही 16 मार्च 2026 को परिवादी को सूचना मिली कि एएसआई धर्मवीर यादव का पुलिस थाना बज्जु से अन्यत्र स्थानांतरण (तबादला) हो चुका है । आरोपी के ट्रांसफर होने और उसके द्वारा लगातार फोन बंद कर दिए जाने के कारण आगे की ट्रैप कार्रवाई संभव नहीं हो सकी, जिसके बाद परिवादी ने लिखित प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई को विराम देने का अनुरोध किया

रंगे हाथों गिरफ्तारी न होने पर भी दर्ज हुआ केस

भले ही आरोपी रंगे हाथों गिरफ्तार नहीं हो सका, लेकिन 1 मार्च और 7 मार्च 2026 को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज हुई ऑडियो फाइलों की ट्रांसक्रिप्ट और फोरेंसिक (SHA-256) हैश वैल्यू से यह पूरी तरह प्रमाणित हो गया कि लोकसेवक धर्मवीर यादव ने पद का दुरुपयोग कर परिवादी से ₹10,000 की मांग की और ₹1,500 की आंशिक रिश्वत प्राप्त की थी

इस पुख्ता डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, जयपुर के पुलिस अधीक्षक सुनील सिहाग के आदेशानुसार आरोपी धर्मवीर यादव (पुत्र महावीर सिंह, निवासी ग्राम कालाखरी, खेतड़ी, झुंझुनूं) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत एफआईआर संख्या 141/2026 दर्ज कर ली गई है । वर्तमान में आरोपी रिजर्व पुलिस लाइन, बीकानेर में तैनात है । इस बड़े भ्रष्टाचार प्रकरण की आगामी विस्तृत जांच बीकानेर इंटेलिजेंस एसीबी के पुलिस निरीक्षक श्री जय कुमार नायक को सौंपी गई है

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