जयपुर। राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) की कार्यशैली एक बार फिर से विवादों और सवालों के घेरे में आ गई है। विदेश से मेडिकल की पढ़ाई (MBBS) पूरी करके आए फोरेन मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) स्टूडेंट्स का परमानेंट रजिस्ट्रेशन रोके जाने के विरोध में छात्रों ने भारी हंगामा किया। मंगलवार को दर्जनों स्टूडेंट्स ने RMC मुख्यालय पर प्रदर्शन करते हुए रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोयल और चेयरमैन डॉ. जगदीश मोदी का घेराव किया।
छात्रों का मुख्य आरोप है कि RMC ने उनका स्थायी रजिस्ट्रेशन यह कहते हुए अटका रखा है कि उन्होंने अपने MBBS कोर्स के दौरान कुछ महीने या साल ऑनलाइन कक्षाएं (Online Classes) ली हैं। काउंसिल का तर्क है कि नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) से गाइडलाइन आने के बाद ही इस पर फैसला लिया जाएगा।
छात्रों का आरोप: “जब पहले रजिस्ट्रेशन हुए, तो अब कौन सा नियम आ गया?”
प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट डॉ. अभिषेक जैमिनी, डॉ. विकास यादव, डॉ. कृष्णा यादव और डॉ. सर्वेश बुगालिया ने RMC प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि इसी काउंसिल ने अप्रैल महीने में 10 से ज्यादा ऐसे छात्रों का रजिस्ट्रेशन किया है, जिन्होंने विदेश से पढ़ाई की थी और कोविड के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं भी ली थीं। छात्रों का सवाल है कि यदि तब रजिस्ट्रेशन हो सकते थे, तो अब उनके मामले में नियम क्यों बदले जा रहे हैं?
स्टूडेंट्स का कहना है कि उन्होंने भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए अनिवार्य और कठिन मानी जाने वाली फोरेन मेडिकल ग्रेजुएशन एग्जामिनेशन (FMGE) को NMC के नॉर्म्स के मुताबिक पास कर लिया है। इसके बावजूद उनका भविष्य अधर में लटकाया जा रहा है।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई, साख पर फिर सवाल
RMC में विदेशी मेडिकल छात्रों के रजिस्ट्रेशन को लेकर पहले भी बड़े फर्जीवाड़े सामने आ चुके हैं। फर्जी तरीके से और पैसे लेकर रजिस्ट्रेशन करने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा को गिरफ्तार किया था। इस पुराने दाग के बाद, अब फिर से रजिस्ट्रेशन में पारदर्शिता की कमी और पक्षपात के आरोप वर्तमान चेयरमैन और रजिस्ट्रार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
छात्रों ने बताया कि NMC ने मार्च में ही एक गाइडलाइन जारी कर स्पष्ट किया था कि बाहर से MBBS करने वाले और ऑनलाइन कक्षाएं लेने वाले छात्रों के लिए ‘कंपनसेशन लेटर’ की जरूरत नहीं है। संबंधित राज्य की मेडिकल काउंसिल अपने स्तर पर इसका निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। इसके बावजूद RMC जानबूझकर मामले को टाल रही है।
RMC का पक्ष: “NMC से मांगा गया है मार्गदर्शन”
इस पूरे विवाद पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोयल ने अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि प्रदर्शन करने वाले वे छात्र हैं जिन्होंने कोविड महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई की थी। इनमें से कुछ ने 6 महीने, कुछ ने एक साल और कुछ छात्रों ने 2 साल तक ऑनलाइन कोर्स किया है।
डॉ. गोयल ने स्पष्ट किया, “कितनी समयावधि तक ऑनलाइन कोर्स करने वाले छात्रों को रजिस्ट्रेशन में छूट दी जा सकती है, इसे लेकर हमने नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) से आधिकारिक मार्गदर्शन मांगा है। NMC की तरफ से स्पष्ट गाइडलाइन आने के बाद ही इन स्टूडेंट्स के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।”
फिलहाल छात्र अपने रजिस्ट्रेशन की मांग पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे।