पुलिस वेलफेयर बोर्ड का ऐतिहासिक फैसला: छात्रवृत्ति दरों में बढ़ोत्तरी पर विचार, पारदर्शी और जवाबदेह बनेगा सहायता तंत्र

जयपुर। राजस्थान पुलिस के जवानों और उनके परिवारों के सामाजिक व आर्थिक संबल के लिए बुधवार को एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। पुलिस मुख्यालय में आयोजित राजस्थान पुलिस कल्याण निधि बोर्ड की 26वीं बैठक में महानिदेशक पुलिस (DGP) राजीव कुमार शर्मा ने कई संवेदनशील और दूरगामी फैसले लिए। इस बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को मिलने वाली राहत रही, जिसके तहत अब वे भी गंभीर और लंबी बीमारियों के इलाज के लिए विभाग से आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकेंगे। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस बल का मनोबल ऊंचा रखना और उनके परिवारों को सम्मान देना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सेवानिवृत्त कर्मियों और प्रसूति व्यय पर विशेष ध्यान

बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया कि अब सेवारत कर्मियों के साथ-साथ सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को भी कैंसर, हृदय रोग जैसी गंभीर एवं दीर्घकालिक बीमारियों के इलाज के लिए पुलिस कल्याण निधि से वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, एक अन्य संवेदनशील निर्णय के तहत, संतान के जन्म (प्रसूति) के दौरान ऑपरेशन या किसी गंभीर स्थिति में होने वाले अतिरिक्त चिकित्सा व्यय के लिए भी विभाग निर्धारित सीमा में आर्थिक मदद उपलब्ध कराएगा।

कर्ज माफी और छात्रवृत्ति पर मंथन

पुलिस विभाग ने अपने दिवंगत साथियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए तृतीय बटालियन आरएसी बीकानेर के स्वर्गीय कांस्टेबल रतनदीप मीणा के परिवार को बड़ी राहत दी है। उनके नाम स्वीकृत 5 लाख रुपये की बकाया ऋण राशि को बोर्ड ने अपलेखित (माफ) करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, तकनीकी और व्यावसायिक छात्रवृत्ति की दरों को बढ़ाने और उन्हें समान करने के प्रस्ताव पर भी गंभीरता से विचार किया गया, जिसका परीक्षण आगामी बैठक में पूरा किया जाएगा।

आधुनिकीकरण और नए जिलों में विस्तार

पुलिस लाइन्स में संचालित कैंटीनों और लाइब्रेरीज को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए अपग्रेडेशन का खाका तैयार किया गया है। डीजीपी शर्मा ने निर्देश दिए कि राजस्थान के नवसृजित जिलों और इकाइयों में भी जल्द ही सीपीसी (CPC) कैंटीनें खोलने के प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएं, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात पुलिसकर्मियों को भी रियायती दरों पर सामग्री मिल सके।

पारदर्शिता और भविष्य की योजना

बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्यय विवरण को मंजूरी देते हुए डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समस्त जिलों और प्रशिक्षण संस्थानों से कल्याणकारी कार्यों के लिए एस्टीमेट मंगाए जाएं। इससे कार्यस्थल का वातावरण बेहतर होगा और सुविधाओं का समान वितरण सुनिश्चित होगा। बैठक में एडीजी (पुलिस कल्याण) डॉ. प्रशाखा माथुर और डीआईजी कुंवर राष्ट्रदीप सहित बोर्ड के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।

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