Expose Now ब्यूरो रिपोर्ट: SEBI का बड़ा एक्शन, राजस्थान की Debock Industries के फर्जीवाड़े का भंडाफोड़, MD मुकेश सिंह समेत 4 पर 29 करोड़ का जुर्माना और 7 साल का बैन

-फर्जी बैलेंस शीट से चमकाई कंपनी, कागजों में मुनाफा दिखाकर NSE मेनबोर्ड पर मारी एंट्री, 59.30 करोड़ की अवैध कमाई होगी जब्त

-बोनस शेयर और राइट इश्यू का बुना जाल, 2018 से 2026 तक चले वित्तीय घोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी

जयपुर। पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने राजस्थान के कॉरपोरेट जगत में फर्जीवाड़े के बड़े सिंडिकेट पर सर्जिकल स्ट्राइक की है। डेबॉक इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Debock Industries Ltd.) और उसके प्रबंध निदेशक (MD) मुकेश सिंह को वित्तीय धोखाधड़ी और बहीखातों में हेराफेरी के आरोप में प्रतिभूति बाजार से 7 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। SEBI ने कंपनी, एमडी मुकेश सिंह और तीन अन्य निदेशकों—सुनील कालोट, प्रियंका शर्मा और गौरव जैन—पर कुल 29 करोड़ से अधिक का जुर्माना ठोका है। इसके साथ ही नियामकीय आदेश में आरोपियों द्वारा कमाए गए 59.30 करोड़ के अवैध लाभ (Ill-gotten Gains) की रिकवरी का सख्त निर्देश भी जारी किया गया है।

फर्जीवाड़े का मास्टरप्लान: कैसे बुना गया जाल?

-कागजी लेन-देन: संबंधित कंपनियों (Related Entities) के बीच फर्जी खरीद-फरोख्त दिखाकर कंपनी की बिक्री और मुनाफे को कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया।

-मेनबोर्ड में एंट्री: बढ़े हुए वित्तीय आंकड़ों के आधार पर कंपनी को NSE के मेनबोर्ड में माइग्रेट कराया गया।

-निवेशकों को झांसा: झूठे मुनाफे के दम पर पहले 1:1 बोनस शेयर बांटे गए और फिर बाजार से मोटा फंड जुटाने के लिए राइट्स इश्यू लाया गया।

घोटाले की पूरी टाइमलाइन (2018 से 2026 तक):-

-2018: डेबॉक इंडस्ट्रीज ने शेयर बाजार में कदम रखा और ट्रेडिंग शुरू हुई।

-2021: कंपनी ने लगभग 3 करोड़ कन्वर्टिबल वारंट जारी किए।

-2022: वारंट्स को शेयरों में बदला गया, कंपनी की आय अचानक 30.78 करोड़ से उछलकर 97.37 करोड़ दिखाई गई और इसी साल कंपनी NSE मेनबोर्ड पर शिफ्ट हुई।

-2023: 1:1 के अनुपात में बोनस शेयर बांटे गए और 49.50 करोड़ का राइट्स इश्यू लाया गया।

-2024: एनएसई (NSE) की प्राथमिक जांच के बाद सेबी ने मामले का संज्ञान लिया और जांच तेज हुई।

-28 अगस्त 2026: SEBI ने अंतिम आदेश पारित कर 7 साल का बैन और भारी-भरकम जुर्माना लगाया।

राजस्थान में SEBI के बड़े एक्शन का इतिहास:-

-2026: मुकेश सिंह (डेबॉक इंडस्ट्रीज) पर 29 करोड़ का जुर्माना और 7 साल का प्रतिबंध।

-2012: पीपल सिंह व अवतार सिंह (NGHI डेवलपर्स) पर बाजार प्रवेश और ट्रेडिंग पर रोक।

-2001: कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम्स के तहत एच.आर. खत्री, एन.के. भूत, शंकर लाल पांडया, मूल नाथ, मधुकर जांगिड़ और संजय पांडया पर 5 साल का बैन।

निवेशकों के भरोसे पर वार, नियामकों का कड़ा संदेश:-

डेबॉक इंडस्ट्रीज पर SEBI का यह कड़ा एक्शन बाजार में हेराफेरी और फर्जी बैलेंस शीट के जरिए निवेशकों की गाढ़ी कमाई लूटने वाले प्रमोटरों के लिए एक सीधा और कड़ा संदेश है। संबंधित कंपनियों के जरिए फर्जी आंकड़े तैयार करना, मेनबोर्ड पर एंट्री लेना और फिर बोनस शेयरों व राइट्स इश्यू के जरिए बाजार को गुमराह करना एक सुनियोजित कॉरपोरेट खेल था, जिसका अब पूरी तरह पर्दाफाश हो चुका है। 59.30 करोड़ की रिकवरी और 7 साल के कड़े प्रतिबंध के जरिए नियामक ने यह साफ कर दिया है कि वित्तीय फर्जीवाड़े पर जवाबदेही तय होकर रहेगी।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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