सिर्फ जल से नहीं, किस वस्तु से अभिषेक करने पर शांत होते हैं कौन-से ग्रह? जानिए शिव पूजा का असली वैज्ञानिक और ज्योतिष रहस्य!

सावन में शिवजी का अभिषेक – लाभ और ग्रह शांति

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र माह माना जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर विभिन्न वस्तुओं से अभिषेक करने की परंपरा है, धार्मिक मान्यता है कि इस माह में श्रद्धा और नियमपूर्वक शिवलिंग का अभिषेक करने से मनोकामनाओं की पूर्ति, मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सावन में शिवजी का अभिषेक करने की सरल विधि

● प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें, संभव हो तो सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें।  मन में भगवान शिव का ध्यान करें।

● पूजा स्थान की शुद्धि करें, शिवलिंग को स्वच्छ जल से धोकर साफ करें।  दीपक और धूप जलाएँ।

●  सबसे पहले जल से अभिषेक करें, तांबे के लोटे से “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए जल अर्पित करें।

● यदि उपलब्ध हो तो गंगाजल अवश्य चढ़ाएँ।

● पंचामृत से अभिषेक करें- दूध,  दही,  घी,  शहद,  शक्कर  ! इसके बाद पुनः स्वच्छ जल से शिवलिंग का अभिषेक करें।

● पूजन सामग्री अर्पित करें- बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला) , धतूरा , आक के फूल, सफेद पुष्प, भस्म, चंदन, मौसमी फल

अलग–अलग वस्तुओं से अभिषेक के लाभ–

शास्त्रों के अनुसार हर वस्तु का अपना अलग महत्व, फल और ग्रह-संबंधी प्रभाव होता है।आइए जानते हैं किस वस्तु से अभिषेक करने पर क्या लाभ मिलता है।

● दही से अभिषेक– मानसिक शांति, बुद्धि और वैवाहिक जीवन में सामंजस्य के लिए किया जाता है। शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।

● गंगाजल/ शुद्ध जल से अभिषेक–  मन की शांति, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति और चंद्र ग्रह की शांति के लिए। मानसिक तनाव और अस्थिरता दूर होती है।                  

● शक्कर मिश्रित जल से अभिषेक– पारिवारिक कलह दूर करने और जीवन में मिठास लाने के लिए उत्तम माना गया है।                   

● दूध से अभिषेक–  संतान सुख, दीर्घायु और स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष फलदायी। चंद्र दोष शांत होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

● शहद से अभिषेक– वाणी में मिठास, संबंधों में सुधार और शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए। बुध ग्रह दोष शांत होता है।          

● घी से अभिषेक– आर्थिक स्थिरता, बल और आयु वृद्धि के लिए किया जाता है। यह सूर्य और गुरु ग्रह दोनों को बल देता है।               

● गन्ने के रस से अभिषेक– आर्थिक उन्नति और व्यापार में वृद्धि बढ़ाने के लिए किया जाता है।

● भांग–धतूरे और बेलपत्र सहित जल से अभिषेक– शनि ग्रह की पीड़ा और साढ़ेसाती के कष्ट को कम करने के लिए विशेष माना गया है, क्योंकि यह शिव जी को अत्यंत प्रिय है। शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम      

● सावन का सबसे शक्तिशाली मंत्र–   कम से कम 108 बार- ॐ नमः शिवाय जप करें या

महामृत्युंजय मंत्र–

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

● सावन के महीने में सच्चे मन और श्रद्धा भाव से अपनी समस्या और ग्रह दोष के अनुसार सही वस्तु का चयन करके अभिषेक करने से जीवन में शीघ्र और स्थायी लाभ प्राप्त होता है।                               

● यह लेख ज्योतिष के दृष्टिकोण पर आधारित है और ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से लिखा गया है। नमस्कार, धन्यवाद।    


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