वास्तु दोषों का दुर्घटनाओं से संबंध–
वास्तु में दिशाओं और तत्वों का विशेष महत्व है। यदि कुछ खास दिशाओं में असंतुलन हो, तो दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। वास्तु के अनुसार, हमारे आस-पास की ऊर्जा हमारे जीवन, स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को सीधे प्रभावित करती है। जब किसी घर, फैक्ट्री या व्यावसायिक स्थल के निर्माण में प्राकृतिक तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है, तो उसे वास्तु दोष कहते हैं। अक्सर लोग वास्तु दोष को सिर्फ धन हानि या पारिवारिक कलह से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका एक बेहद गंभीर पहलू अचानक होने वाली दुर्घटनाएं, वाहन दुर्घटनाएं और गंभीर शारीरिक चोटें भी हैं।
कहीं आपकी गाड़ी बार-बार एक्सीडेंट के चक्कर में तो नहीं फस रही, आपके घर या फैक्ट्री में अचानक सीढ़ियों से फिसलने की घटनाएं तो नहीं बढ़ रही, किचन में जलना, बाथरूम में गिरना यह सारी घटनाएं महज एक संयोग नहीं बल्कि आपके घर के वास्तु दोषों का प्रभाव भी हो सकती हैं। आज हम बात करेंगे कि कौन-कौनसे वास्तु दोष आपके जीवन में बड़ी और भयंकर दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। इन प्रमुख वास्तु दोषों में आग्नेय कोण और नैऋत्य कोंण की बात होगी, इसके साथ ही जानेंगे कि कैसे सटीक उपायों के माध्यम से इन दुर्घटनाओं से बचाव किया जा सकता है। ज्यादातर केस में जब आपके घर या ऑफिस के आग्नेय कोण और नैऋत्य कोंण में वास्तु दोष बढ़ जाते हैं तब आपके जीवन में बार-बार दुर्घटनाओं की संभावना भी काफी बढ़ जाती है। आइए समझते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार कौन से मुख्य दोष दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है।
● आग्नेय कोण के वास्तु दोष और दुर्घटनाएं-
वास्तु के अनुसार घर के अग्नि कोण में बोरवेल, हेडपंप, पानी की बड़ी टंकी या पानी का टैंक को बना देना या फिर अग्नि कोण में मास्टर बेडरूम, न्यू कपल या फिर बुजुर्गों का बेडरूम बना देना, यहां पर टॉयलेट या सेप्टिक टैंक का निर्माण काफी बड़ा वास्तु दोष माना जाता है और इन वास्तु दोषों के कारण ही आपके जीवन में बड़ी दुर्घटनाओं की संभावनाएं काफी बढ़ जाती है इसके साथ ही बिजनेस में भी कैश फ्लो को लेकर काफी समस्याओं का आपको सामना करना पड़ सकता है। आग्नेय कोण में सीढ़ियों को बनाने या फिर गलत नक्शा बन जाने के कारण बिना किसी वास्तुविद की सलाह के यहां पर कोई भारी निर्माण करना या फिर इस जगह पर मुख्य द्वार की स्थापना कर देना, कई बार इस जगह ढलान अथवा गड्ढे के कारण भी बड़े वास्तु दोष पैदा हो जाते हैं। जिससे आपके घर, परिवार के लोगों को सड़क पर दुर्घटनाएं, गिरकर या फिसल कर चोट लगने की परेशानी, आग या करंट की समस्या, बेचैनी रहना, बार-बार चीजों का टूटना, बुजुर्गों की तबीयत खराब रहना, सर में चोट लगाना, मशीन से एक्सीडेंट या फिर हाथ पैरों का टूटने से संबंधित परेशानियों का भी आपको सामना करना पड़ सकता है। आग्नेय कोण में प्रबल वास्तु दोष होने की स्थिति में आपको ओपेल रत्नों से युक्त हस्त निर्मित अग्नि दोष निवारक अथवा शुक्र ग्रह के वैदिक यंत्र की स्थापना अवश्य करनी चाहिए।
● नैऋत्य कोंण के वास्तु दोष और दुर्घटनाएं-
घर के दक्षिण पश्चिम के कोण को नैऋत्य कोंण के नाम से जाना जाता है। जब यह कोण कट जाए अथवा यहां ढलान, बड़ा गड्ढा, बोरवेल, सेप्टिक टैंक, रसोई या टॉयलेट का निर्माण कर दिया जाता है तो यहां बड़े वास्तु दोष पैदा हो जाते हैं जिनके कारण यहां रहने वाले लोगों के जीवन में आकस्मिक दुर्घटनाएं, मानसिक तनाव, गंभीर चोट, मानसिक बीमारियां, अशांति, कोर्ट कचहरी के चक्कर, नाम खराब होने की समस्या, संतान की उन्नति में बाधा, आर्थिक नुकसान और शत्रुओं की अधिकता भी देखने को मिल सकती है। घर अथवा ऑफिस के इस कोण में मुख्य दरवाजा बनाने पर भी व्यक्ति को जीवन में काफी अशांति और स्थिरता की कमी के साथ ही बड़ी दुर्घटनाओं का भी सामना करना पड़ता है। घर अथवा ऑफिस के नैऋत्य कोंण में वास्तु दोष होने पर यहां की पॉजिटिव एनर्जी को एक्टिव करने एवं वास्तु दोषों को कम करने के लिए आपको निश्चित रूप से गोमेद रत्नों से युक्त हस्त निर्मित नैऋत्य दोष निवारक यंत्र अथवा राहु ग्रह का वैदिक यंत्र अवश्य ही इस कोण में स्थापित करना चाहिए।
दुर्घटनाओं से बचाव के उपाय–
यदि आपके घर में तोड़-फोड़ करना संभव न हो, तो आप इन आसान उपायों से नकारात्मक ऊर्जा को कम कर सकते हैं-
● यदि आपका भी घर अथवा ऑफिस के वास्तु दोषों के कारण दुर्घटनाओं से सामना हो रहा है तो सबसे पहले आपको हस्त निर्मित यंत्रों के माध्यम से इन वास्तु दोषों को कम करके पॉजिटिव एनर्जी को एक्टिव करने का प्रयास करना चाहिए।
● दक्षिण-पश्चिम दिशा में कभी गड्ढा न रहने दें। यहाँ भारी फर्नीचर रखें या एक पीला बल्ब हमेशा जलने दें।
● घर के मुख्य द्वार पर या दक्षिण-पश्चिम दिशा में पंचमुखी हनुमान कवच लगाने से दुर्घटनाओं का भय कम होता है।
● अग्नि कोण में जलीय तत्व से जुड़े हुए रंगों के प्रयोग से बचें और वहां पर लाल अथवा नारंगी या फिर सफेद रंग का प्रयोग करें।
● घर के कोनों में या पोछे के पानी में सेंधा नमक का इस्तेमाल करें, यह नकारात्मक तरंगों को सोख लेता है।
● मंगलवार एवं शनिवार को पोंछे में नमक का प्रयोग भी आपके घर और ऑफिस में नकारात्मक ऊर्जा कम करने में काफी सहायक हो सकता है।
● मित्रों आप सभी ज्योतिष और वास्तु के विशेष उपायों और वैदिक यंत्रों की एनर्जी के माध्यम से आगे बढ़िये, निश्चित रूप से आपको जीवन में उन्नति, सकारात्मक ऊर्जा, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति होगी।
Note- यह लेख वास्तु के दृष्टिकोण पर आधारित है और ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से लिखा गया है।

