राजस्थान के तेजी से उभरते रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता दर्ज की गई है। राज्य में यह पहला मौका है जब किसी बिना मां के बाघ शावक को वन विभाग ने वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत सफलतापूर्वक जंगल के अनुकूल (री-वाइल्डिंग) बनाया है।
विशेषज्ञों की विस्तृत वैज्ञानिक प्रक्रिया के बाद 23 जून 2026 को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़े गए बाघ आरवीटी-7 ने मात्र दो महीनों के भीतर ही जंगल के परिवेश के साथ पूरी तरह तालमेल बिठा लिया है।

सफलता के मुख्य बिंदु:
- विस्तृत क्षेत्र का भ्रमण: हार्ड रिलीज के बाद की गई मॉनिटरिंग से पता चला है कि इस बाघ ने अब तक लगभग 41 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का भ्रमण किया है।
- प्राकृतिक शिकार में सक्षम: बाघ ने जंगल में अब तक आधा दर्जन प्राकृतिक शिकार सफलतापूर्वक किए हैं, जो उसकी स्वतंत्र शिकार क्षमता और री-वाइल्डिंग की सफलता का प्रमाण है।
- सामान्य क्षेत्रीय व्यवहार: बाघ द्वारा इलाके में सेंट स्प्रे (सुगंध छोड़ना) और पेड़ों पर पंजों के निशान बनाने जैसे स्वाभाविक टेरीटोरियल व्यवहार देखे गए हैं।
- क्षेत्रीय सामंजस्य: टाइगर रिजर्व में पहले से राज करने वाले बाघ आरवीटी-1 के साथ दो-तीन बार आमना-सामना होने के बावजूद दोनों नर बाघों के बीच कोई आक्रामक संघर्ष नहीं हुआ है, जो इस रिजर्व के लिए शुभ संकेत है।
- प्रजनन और सह-अस्तित्व: इस युवा बाघ को अधिकतर युवा बाघिन आरवीटी-6 के साथ देखा गया है तथा उनके बीच मैटिंग व्यवहार भी रिकॉर्ड किया गया है, जो इसके सफल अनुकूलन को दर्शाता है।