NH-27 पर नियमों की धज्जियां: हाईटेंशन लाइन के नीचे बिना NOC चल रहा क्रेशर

बूंदी। जिले के धनेश्वर टोल प्लाजा के पास नेशनल हाईवे 27 (कोटा-चित्तौड़ राजमार्ग) पर नियमों को ताक पर रखकर मौत का खेल खेला जा रहा है। हाईवे से मात्र 900 मीटर की दूरी पर संचालित एक क्रेशर प्लांट न केवल पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर रहा है, बल्कि 33 मेगावाट की हाईटेंशन लाइन के ठीक नीचे ब्लास्टिंग कर एक बड़ी जनहानि को न्योता दे रहा है।

33KV लाइन के नीचे बारूद का खेल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस क्रेशर प्लांट के ठीक ऊपर से जवाहर सागर बांध विद्युत उत्पादन निगम की 33 मेगावाट वाली हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। पत्थर निकालने के लिए की जाने वाली तीव्र ब्लास्टिंग से होने वाले कंपन के कारण कभी भी यह लाइन टूट सकती है। यदि ऐसा होता है, तो रावतभाटा पावर प्लांट और जवाहर सागर से जुड़ी इस महत्वपूर्ण विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को भारी नुकसान पहुँच सकता है और मौके पर बड़ी जनहानि हो सकती है।

टाइगर कॉरिडोर की सीमा पर ‘जंगलराज’

यह क्रेशर प्लांट बूंदी वन विभाग के अंतर्गत रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व कॉरिडोर की सीमा के बेहद करीब स्थित है। नियमानुसार, ईको-सेंसिटिव जोन और टाइगर रिजर्व की सीमा के एक किलोमीटर के दायरे में किसी भी तरह की ब्लास्टिंग या प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद, दोपहर के समय यहाँ होने वाले बारूद के धमाकों से वन्य जीव विचलित हो रहे हैं।

बिना प्रदूषण NOC के फल-फूल रहा अवैध धंधा

जांच में सामने आया है कि इस क्षेत्र में दर्जनों की संख्या में अवैध क्रेशर बिना किसी पर्यावरण अनापत्ति (NOC) के संचालित हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों की अनदेखी कर यहाँ दिन-रात गिट्टी बनाने का काम धड़ल्ले से जारी है। डंपरों के माध्यम से गिट्टी का अवैध परिवहन किया जा रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र धूल के गुबार में डूबा रहता है।

अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी

विद्युत उत्पादन निगम और वन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जब इस मामले में संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन काट दिए या जवाब देने से बचते नजर आए। अधिकारियों की यह मौन सहमति क्रेशर माफियाओं के हौसले बुलंद कर रही है।

स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि इस अवैध क्रेशर को तुरंत बंद किया जाए और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।

Share This Article
Leave a Comment