राजस्थान में UCC लाने की तैयारी: विधि मंत्री जोगाराम पटेल का बड़ा एलान; सभी धर्मों के लिए एक होगा शादी, तलाक और संपत्ति का कानून

जयपुर: राजस्थान की भजनलाल सरकार प्रदेश में एक ऐतिहासिक और बड़ा कानूनी बदलाव करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर अब राजस्थान में भी यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी – समान नागरिक संहिता) लागू किया जाएगा। सोमवार को जयपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में सूबे के विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म की मौजूदगी में यह बड़ा एलान किया। उन्होंने साफ किया कि इस कानून के आने के बाद प्रदेश के सभी नागरिकों पर धर्म, जाति और समुदाय से परे एक समान नागरिक कानून लागू होगा।

क्या है UCC का उद्देश्य और क्यों पड़ी जरूरत?

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने इसके संवैधानिक आधार और जरूरत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:

“देश और प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की आवश्यकता है। हमारे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 (Article 44) में भी राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। इसी संवैधानिक भावना और जनता की मांग के अनुरूप हमारी सरकार यूसीसी लागू करने की दिशा में मजबूती से कार्य कर रही है।”

खत्म होंगे पर्सनल लॉ, इन मामलों में सब पर लागू होगी एक व्यवस्था

मंत्री पटेल ने स्पष्ट किया कि यूसीसी लागू होने के बाद वर्तमान में प्रचलित विभिन्न पर्सनल लॉ, जैसे हिंदू कोड बिल और मुस्लिम पर्सनल लॉ की अलग-अलग व्यवस्थाएं पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी। इसके स्थान पर केवल एक नागरिक कानून प्रभावी होगा, जो निम्नलिखित मामलों को नियंत्रित करेगा:

  • विवाह और तलाक (Marriage & Divorce)
  • उत्तराधिकार और संपत्ति का बंटवारा (Succession & Property Rights)
  • गोद लेना (Adoption)
  • भरण-पोषण (Maintenance/Alimony)

प्रस्तावित कानून के 3 सबसे बड़े और कड़े प्रावधान

विधि मंत्री ने बताया कि यूसीसी का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समाज में समान अधिकार प्रदान करना तथा लैंगिक समानता (Gender Equality) को बढ़ावा देना है। इस प्रस्तावित कानून में ये महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए जा सकते हैं:

  1. बहुविवाह (Polygamy) पर पूर्ण रोक: किसी भी धर्म या समुदाय के व्यक्ति को एक से अधिक शादी करने की कानूनी अनुमति नहीं होगी।
  2. अनिवार्य पंजीकरण: शादी और तलाक का सरकारी तौर पर रजिस्ट्रेशन कराना हर नागरिक के लिए अनिवार्य होगा।
  3. बेटियों को समान हक: पैतृक संपत्ति में पुत्र और पुत्री (बेटे और बेटी) को बिल्कुल बराबर का कानूनी अधिकार मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों की कमेटी करेगी ड्राफ्ट का अध्ययन

जोगाराम पटेल ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारीकी से अध्ययन और जनता के सुझावों के लिए एक उच्च स्तरीय समिति (Committee) का गठन कर दिया है। इस विशेष समिति में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों सहित विभिन्न सामाजिक और कानूनी वर्गों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। यह कमेटी कानून के सभी व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन कर जल्द ही अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

उन्होंने याद दिलाया कि देश में उत्तराखंड, गुजरात और असम अपने स्तर पर यूसीसी कानून को लेकर कदम उठा चुके हैं या पारित कर चुके हैं, जबकि गोवा में पुर्तगाली शासन के समय से ही समान नागरिक संहिता जैसी व्यवस्था लागू है। राजस्थान सरकार इस बहुप्रतीक्षित UCC बिल को आगामी विधानसभा सत्र में पटल पर रख सकती है।


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