सरकारी स्कूलों में 2586 पदों पर भर्ती की तैयारी, 2502 वोकेशनल ट्रेनर और 84 कोऑर्डिनेटर होंगे नियुक्त

जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद (RCScE) ने नई ई-बिड जारी करते हुए राज्य के विभिन्न सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में 2502 व्यवसायिक प्रशिक्षकों (Vocational Trainers) और 84 वोकेशनल कोऑर्डिनेटरों की नियुक्ति का रास्ता खोल दिया है। यह नियुक्तियां जुलाई 2026 से मार्च 2029 तक की अवधि के लिए की जाएंगी।

इस भर्ती से हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है, वहीं सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को व्यावसायिक एवं कौशल आधारित प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा। शिक्षा परिषद द्वारा जारी बिड के अनुसार चयनित प्रशिक्षकों को मासिक 23,500 रुपये तक का मानदेय दिया जाएगा, जबकि वोकेशनल कोऑर्डिनेटरों को अलग से निर्धारित मानदेय मिलेगा।

1736 सरकारी स्कूलों में होगी नियुक्ति

परिषद की योजना के तहत राज्य के 1736 सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षकों और समन्वयकों की तैनाती की जाएगी। इनमें से 1527 मौजूदा विद्यालयों में 2248 व्यवसायिक प्रशिक्षक और 75 वोकेशनल कोऑर्डिनेटर लगाए जाएंगे, जबकि 209 नए विद्यालयों में 254 प्रशिक्षक और 9 कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए जाएंगे।

16 प्रमुख क्षेत्रों में मिलेगा प्रशिक्षण

भर्ती के तहत आईटी-आईटीईएस, कृषि, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, रिटेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य, पर्यटन एवं आतिथ्य, सुरक्षा, टेलीकॉम, ब्यूटी एंड वेलनेस, फूड प्रोसेसिंग, प्लंबिंग और अन्य क्षेत्रों में प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इन प्रशिक्षकों का मुख्य कार्य विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रदान करना होगा।

192 करोड़ रुपये से अधिक का प्रोजेक्ट

इस पूरी योजना का अनुमानित मूल्य लगभग 192.77 करोड़ रुपये है। राजस्थान में व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम वर्ष 2014-15 से संचालित हो रहा है और वर्तमान में हजारों विद्यार्थी इसके माध्यम से कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। नई बिड के जरिए राज्य सरकार इस व्यवस्था का और विस्तार करना चाहती है।

प्रशिक्षकों में वेतन और स्थायीकरण को लेकर नाराजगी

हालांकि नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से रोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं, लेकिन व्यवसायिक प्रशिक्षकों के संगठनों ने वेतन और सेवा शर्तों को लेकर असंतोष जताया है। उनका कहना है कि पड़ोसी राज्यों हरियाणा और दिल्ली में व्यवसायिक शिक्षकों को अधिक वेतन और बेहतर सेवा सुरक्षा मिल रही है, जबकि राजस्थान में अब भी प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से संविदा आधार पर नियुक्तियां की जा रही हैं।

छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय स्तर पर कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने से विद्यार्थियों को रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे। राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) के तहत संचालित यह कार्यक्रम छात्रों को स्कूल शिक्षा के साथ-साथ उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराता है।

राज्य सरकार की यह पहल न केवल युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, बल्कि राजस्थान में कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा को भी नई दिशा देने का काम करेगी।


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