भजनलाल सरकार की सख्ती: स्कूलों की बदहाली छिपाने का आरोप लगा विपक्ष हमलावर, शिक्षा विभाग के नए आदेश पर गरमाई सियासत

जयपुर: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर एक कड़ा और बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बिना अनुमति के बाहरी लोगों के प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार द्वारा जारी इस नए आदेश के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे सरकार की नाकामी छिपाने वाला “तानाशाही आदेश” करार दिया है, वहीं कांग्रेस ने इसके खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन की चेतावनी दी है।

शिक्षा विभाग के नए आदेश की मुख्य बातें

  • प्रवेश पर पाबंदी: स्कूल के प्रधानाचार्य या संस्था प्रधान की पूर्व लिखित अनुमति के बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति, संगठन का प्रतिनिधि या मीडियाकर्मी स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। केवल आधिकारिक शासकीय ड्यूटी पर तैनात अधिकृत अधिकारियों को इससे छूट दी गई है।
  • विजिटर रजिस्टर अनिवार्य: विद्यालय में आने वाले प्रत्येक आगंतुक को प्रवेश से पहले विजिटर रजिस्टर में अपनी प्रविष्टि दर्ज करनी होगी।
  • फोटो और वीडियोग्राफी पर रोक: बिना प्रिंसिपल की लिखित अनुमति के छात्रों, शिक्षकों या शैक्षणिक गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार, ऑडियो रिकॉर्डिंग या लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जा सकेगी।
  • निजता और सुरक्षा का हवाला: आदेश में कहा गया है कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की गरिमा, निजता और सुरक्षा को सुरक्षित रखना तथा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करना है।
  • सख्त कानूनी कार्रवाई: यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के प्रवेश करता है, परिसर छोड़ने से इंकार करता है या स्कूल के कार्य में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), पोक्सो (POCSO) अधिनियम और अन्य विधिक प्रावधानों के तहत पुलिस कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्ष ने बोला हमला

इस आदेश के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों और नेताओं तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं:

  • नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का बयान: जूली ने कहा कि भाजपा सरकार ने टूटी छतों, टपकती कक्षाओं और शिक्षकों की भारी कमी जैसी बुनियादी समस्याओं को सुधारने के बजाय उन्हें दुनिया की नजरों से छिपाने का रास्ता ढूंढ लिया है। उन्होंने इसे तानाशाही आदेश बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर राज्य में सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया जाएगा।
  • कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का वार: डोटासरा ने तंज कसते हुए कहा कि “अगर स्कूलों में सब कुछ ठीक है तो डर कैसा?” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामी और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को छुपाने के लिए ऐसे प्रतिबंध लगा रही है ताकि कोई जर्जर कमरों और व्यवस्था की पोल न खोल सके। उन्होंने कहा कि विद्यालय जनता की संपत्ति हैं, किसी दल की निजी जागीर नहीं।

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