-पुलिस और सरकार के दावों की खुली पोल: Expose Now की इन्वेस्टिगेशन में खौफनाक आंकड़े आए सामने
-थानों में नहीं होती सुनवाई, अदालतों के जरिए दर्ज हो रहे दरिंदगी के मामले, खाकी की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
-2 साल में 909 नाबालिगों से सामूहिक दुष्कर्म, खुलेआम घूम रहे दरिंदे, पुलिस के हाथ खाली
-सुरक्षित राजस्थान का दावा हवा-हवाई, बदलता परिवेश और लचर कानून व्यवस्था बेटियों के लिए बनी सबसे बड़ा खतरा
जयपुर। राजस्थान की सियासत में ‘सुशासन’, ‘महिला सुरक्षा’ और ‘बेटी बचाओ’ के नारे चाहे जितने बुलंद हों, लेकिन हकीकत की पथरीली जमीन पर ये सारे सरकारी दावे लहूलुहान होकर दम तोड़ चुके हैं। सत्ता के वातानुकूलित गलियारों में बजने वाले खोखले ढोल और कागजी वादों की चकाचौंध के पीछे एक ऐसा खौफनाक और स्याह सच छिपा है, जिसे जानकर किसी भी सभ्य समाज की रूह कांप उठेगी। ‘Expose Now’ की सबसे बड़ी और एक्सक्लूसिव इन्वेस्टिगेशन में राजस्थान का जो वीभत्स चेहरा बेनकाब हुआ है, वह हुक्मरानों की नींद उड़ाने और पूरे पुलिस महकमे को शर्मसार करने के लिए काफी है।
हमारी गहरी पड़ताल में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि वर्तमान भाजपा सरकार के 2 साल के कार्यकाल (2024 और 2025) में वीरों की यह धरती, मासूम और नाबालिग बच्चियों के लिए अपराध का एक ऐसा खुला मैदान बन चुकी है, जहां हैवान बेखौफ होकर शिकार कर रहे हैं और ‘मित्र पुलिस’ महज़ तमाशबीन बनी हुई है। क्या हमारा सिस्टम इतना लाचार और संवेदनहीन हो चुका है कि उसे अपने ही आंगन में लुटती बेटियों की चीखें सुनाई नहीं देतीं?
जिन थानों को आम अवाम की सुरक्षा का मंदिर कहा जाता है, वहां आज न्याय की गुहार लगाती पीड़ित बच्चियों की कोई सुनवाई नहीं है। कानून का इकबाल अपराधियों के जहन से इस कदर खत्म हो चुका है कि दरिंदगी और सामूहिक दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदातें अब प्रदेश की दिनचर्या का हिस्सा बनती जा रही हैं। ‘Expose Now’ की इस बेखौफ पड़ताल में सामने आए खौफनाक आंकड़े महज कुछ नंबर नहीं हैं, बल्कि ये उन हजारों मासूम बेटियों की आबरू और उनके उजड़ते बचपन के वे दस्तावेज हैं, जिन्हें इस सड़े-गले सिस्टम और कुंभकर्णी नींद में सो रही सरकार ने जीते जी मार डाला है। यह रिपोर्ट उस ‘दुशासन’ का पर्दाफाश करती है, जिसने राजस्थान के शांत और सुरक्षित परिवेश को हमेशा के लिए दागदार कर दिया है।
आंकड़ों की जुबानी, खौफनाक है राजस्थान की कहानी:-
हमारी पड़ताल में राज्य सरकार और पुलिस महकमे को सीधे कटघरे में खड़ा करने वाले जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं:
-नाबालिगों से दुष्कर्म की बढ़ती सुनामी: प्रदेश में 01 जनवरी 2024 से 31 दिसम्बर 2025 के बीच नाबालिग लड़कियों के साथ दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी गईं। वर्ष 2024 में नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म के 1083 मामले दर्ज किए गए। हालात सुधरने के बजाय वर्ष 2025 में और बेकाबू हो गए, जब यह आंकड़ा बढ़कर 1260 तक पहुंच गया।
-गैंगरेप का खौफनाक मंजर: राजस्थान में दरिंदे अब बेखौफ होकर सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) जैसी घिनौनी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। वर्ष 2024 में नाबालिगों से गैंगरेप के 488 मामले दर्ज किए गए, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या 421 रही। कुल मिलाकर महज दो साल के कार्यकाल में 909 नाबालिग बच्चियां सामूहिक दरिंदगी का शिकार हुई हैं।
सरकारी आंकड़ों की खौफनाक हकीकत, 2 साल में छिनती बेटियों की आबरू:-
| वर्ष | नाबालिगों से दुष्कर्म के मामले | नाबालिगों से गैंगरेप के मामले | कुल खौफनाक वारदातें |
| 2024 | 1083 | 488 | 1571 |
| 2025 | 1260 | 421 | 1681 |
| कुल (महज 2 सालों में) | 2343 | 909 | 3252 |
पुलिस पर से उठा जनता का विश्वास, अदालतों की शरण में पीड़ित:-
सरकार पुलिस के आधुनिकीकरण और महिला थानों की बात करती है, लेकिन ‘Expose Now’ की रिपोर्ट पुलिस महकमे की संवेदनहीनता को बेनकाब करती है। जब पीड़ितों को थानों से दुत्कार कर भगा दिया जाता है, तब उन्हें अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।
-वर्ष 2024 में पुलिस ने जब दुष्कर्म के मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं की, तो 48 मामलों में सी.आर.पी.सी. की धारा 156(3) / 175(3) बी.एन.एस.एस. के तहत अदालतों के माध्यम से मुकदमे दर्ज कराने पड़े।
-वर्ष 2025 में अदालतों के जरिए दुष्कर्म के दर्ज होने वाले मुकदमों की संख्या बढ़कर 68 हो गई।
-गैंगरेप जैसे जघन्य अपराधों में भी पुलिस की लापरवाही चरम पर रही। 2024 में 11 और 2025 में 29 गैंगरेप के मामले अदालतों के दखल के बाद दर्ज किए गए। यह आंकड़े पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बदनुमा दाग हैं।
जिलेवार अपराध का ग्राफ, कहां सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं बेटियां
राजस्थान का कोई भी कोना अब बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं बचा है। एक्सपोज नाउ के पास मौजूद जिलेवार रिपोर्ट के अनुसार, कई जिले तो मानो अपराधियों की राजधानी बन चुके हैं:
- उदयपुर: झीलों की नगरी उदयपुर अपराध की नगरी में तब्दील हो गई है। वर्ष 2024 में यहां दुष्कर्म के 45 और 2025 में सर्वाधिक 49 मामले दर्ज किए गए।
- बीकानेर और सीकर: वर्ष 2024 में बीकानेर में 52 मामले दर्ज हुए। सीकर जिले में 2024 में 31 मामले थे, जो 2025 में भयानक रूप से बढ़कर 48 हो गए।
- अलवर (गैंगरेप में सबसे आगे): अलवर जिले की स्थिति बेहद भयावह है। वर्ष 2024 में अकेले अलवर में नाबालिगों से गैंगरेप के 35 मामले सामने आए।
- डीग: डीग जिले में भी गैंगरेप के 2024 में 25 मामले दर्ज किए गए।
अपराधी बेखौफ, पुलिस के हाथ खाली:-
सरकार के दावों की सबसे बड़ी पोल तब खुलती है, जब बात अपराधियों की गिरफ़्तारी की आती है। ‘Expose Now’ की पड़ताल से पता चला है कि दरिंदगी को अंजाम देने वाले दर्जनों अपराधी महीनों और सालों से फरार चल रहे हैं।
-अजमेर के सरवाड़ थाने में दर्ज मामले (386/25) में लक्की माली नाम का अपराधी दिसंबर 2025 से फरार है।
-डीडवाना-कुचामन, चूरू, सीकर और कोटपूतली-बहरोड़ जैसे जिलों में गंभीर धाराओं (पॉक्सो एक्ट और बीएनएस) में नामजद अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन पुलिस उन्हें पकड़ने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
-जयपुर जैसे राजधानी क्षेत्र में भी श्याम नगर और बजाज नगर थानों में दर्ज पॉक्सो एक्ट के गंभीर मामलों के अपराधी घटना के बाद से ही पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं।
बदलता परिवेश और कटघरे में सरकार:-
राजस्थान का जो सामाजिक परिवेश कभी अपनी संस्कृति और मर्यादाओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता था, वह अब अपराध और हैवानियत की भेंट चढ़ चुका है। 2 साल में 2300 से अधिक दुष्कर्म और 909 गैंगरेप की घटनाएं सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह उन 3200 से अधिक परिवारों की चीखें हैं, जिन्हें सिस्टम ने जीते जी मार दिया है।
क्या सरकार और पुलिस प्रशासन इन आंकड़ों को देखकर भी अपनी पीठ थपथपाता रहेगा? थानों में सुनवाई न होना और अपराधियों का बेखौफ फरार रहना, यह साफ दर्शाता है कि अपराधियों को कहीं न कहीं सिस्टम का संरक्षण प्राप्त है। ‘Expose Now’ की यह इन्वेस्टिगेशन राजस्थान सरकार और पुलिस के आला अधिकारियों से यह सीधा सवाल पूछती है कि आखिर प्रदेश की बेटियों को यह ‘दुशासन’ कब तक झेलना पड़ेगा?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now