बीमार कर्मचारी की मजबूरी का फायदा उठाना पड़ा भारी, मेडिकल लीव के नाम पर रिश्वत लेते रोडवेज मैनेजर गिरफ्तार

राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को जारी रखते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की अलवर इकाई ने बड़ी सफलता हासिल की है । ब्यूरो ने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) के दौसा आगार में कार्यरत मुख्य प्रबंधक विश्राम मीणा को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है

पूरा मामला: मेडिकल लीव के बदले मांगी घूस

प्रकरण के अनुसार, परिवादी रेवडमल माली, जो दौसा आगार में परिचालक (Conductor) के पद पर कार्यरत है, ने एसीबी हेल्पलाइन नंबर 1064 पर शिकायत दर्ज कराई थी । परिवादी ने बताया कि वह 18 दिसंबर 2025 से 18 जनवरी 2026 तक बीमार होने के कारण मेडिकल अवकाश पर था । स्वस्थ होने के बाद जब उसने ड्यूटी जॉइन की और अपने मेडिकल अवकाश को स्वीकृत कराने के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा किए, तो मुख्य प्रबंधक विश्राम मीणा ने इस कार्य के बदले 20,000 रुपये की रिश्वत की मांग की

एसीबी का जाल और सत्यापन

परिवादी की शिकायत पर एसीबी अलवर के उप अधीक्षक शब्बीर खान के नेतृत्व में सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई

  • पहला सत्यापन: 2 अप्रैल 2026 को किया गया, जिसमें रिश्वत की बातचीत का प्रयास हुआ ।
  • दूसरा सत्यापन: 7 अप्रैल 2026 को गोपनीय तरीके से किया गया, जिसमें आरोपी द्वारा 20,000 रुपये की मांग की पुष्टि स्पष्ट रूप से हुई ।

ट्रैप कार्यवाही: रंगे हाथों पकड़े गए मुख्य प्रबंधक

8 अप्रैल 2026 को एसीबी टीम ने जाल बिछाया । परिवादी रेवडमल जैसे ही मुख्य प्रबंधक के कार्यालय पहुंचा और उन्हें रिश्वत की राशि सौंपी, आरोपी ने रुपये लेकर अपनी पैंट की पिछली जेब में रख लिए । इशारा मिलते ही एसीबी टीम ने दबिश दी और आरोपी विश्राम मीणा को दबोच लिया । आरोपी के हाथों और पैंट की जेब का रासायनिक धोवन लेने पर उसका रंग हल्का गुलाबी हो गया, जो रिश्वत लेने का वैज्ञानिक प्रमाण है

कानूनी कार्यवाही

एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है । आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है । इस मामले की आगे की जांच अब एसीबी दौसा के उप अधीक्षक रविन्द्र सिंह शेखावत को सौंपी गई है

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