केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की आर्थिक अपराध शाखा (EOB), कोलकाता ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के साथ करोड़ों रुपये की बैंक धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और ऋण गबन के दो अलग-अलग मामलों में ‘मैसर्स सन फोटोकेमिकल प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘मैसर्स श्री राधे कृष्ण स्मेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड’ सहित उनके निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई द्वारा अप्रैल 2026 में दर्ज की गई इन एफआईआर के अनुसार, दोनों कंपनियों और उनके प्रमोटरों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर एक गहरी आपराधिक साजिश रची थी।
- धोखाधड़ी का तरीका: कंपनियों ने बैंक से ऋण सुविधा (Credit Facilities) प्राप्त करने और बाद में उसे बढ़वाने (Enhancement) के लिए कथित तौर पर जाली और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया।
- फंड का डायवर्जन: आरोप है कि बैंक से प्राप्त ऋण राशि का उपयोग उस व्यावसायिक उद्देश्य के लिए नहीं किया गया जिसके लिए वह स्वीकृत हुई थी। फंड को अवैध रूप से अन्य गतिविधियों या निजी लाभ के लिए डाइवर्ट कर दिया गया।
- एनपीए और वित्तीय हानि: ऋण चुकाने में विफलता और खातों में हेराफेरी के कारण ये खाते ‘एनपीए’ (NPA) हो गए, जिससे भारतीय स्टेट बैंक और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हुआ।
इनके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
सीबीआई ने कोलकाता की विशेष अदालत में दर्ज मामलों में मुख्य रूप से निम्नलिखित को आरोपी बनाया है:
- मैसर्स सन फोटोकेमिकल प्राइवेट लिमिटेड (हावड़ा/कोलकाता)।
- मैसर्स श्री राधे कृष्ण स्मेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (कोलकाता)।
- दोनों कंपनियों के तत्कालीन निदेशक और प्रमोटर।
- कुछ अज्ञात लोक सेवक (बैंक अधिकारी) और अन्य निजी व्यक्ति।
जांच के दायरे में हावड़ा की विशाल संपत्तियां
सीबीआई की जांच अब इन कंपनियों द्वारा कोलेटरल सिक्योरिटी के रूप में गिरवी रखी गई संपत्तियों पर केंद्रित है।
- राधे कृष्ण स्मेल्टर्स: हावड़ा के बागनान (मोजा-कोरेया) स्थित लगभग 1134.98 कट्ठा (8,17,186 वर्ग फुट) जमीन के 20 डीड्स बैंक के पास रखे गए थे।
- सन फोटोकेमिकल: इसी क्षेत्र में लगभग 27 बीघा और 10.50 बीघा जमीन के दस्तावेजों को अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में दिखाया गया था। सीबीआई अब इन संपत्तियों के वास्तविक मूल्यांकन और स्वामित्व दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है।
कानूनी कार्रवाई और धाराएं
सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 409 (आपराधिक विश्वासघात) और 477A (खातों में हेराफेरी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
वर्तमान स्थिति: बैंक के डीजीएम रजनीश रंजन रॉय और सीबीआई के अधिकारियों की शिकायतों के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। एजेंसी अब आरोपियों की तलाश और उनके ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी कर रही है।
