जयपुर: राजस्थान के करौली जिले में पिछले दो दशकों से चले आ रहे बहुचर्चित पांचना बांध जल विवाद का अब पटाक्षेप हो गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल हस्तक्षेप और उनकी टीम की सक्रियता से गुर्जर और मीणा समाज के बीच आम सहमति बन गई है। इस ऐतिहासिक समझौते के बाद क्षेत्र में वर्षों से जारी तनाव अब खुशहाली में बदलने की उम्मीद है।

सरकार और समुदायों के बीच बनी सर्वसम्मति
इस जटिल विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने पूरी गंभीरता दिखाई। शिक्षा संकुल में आयोजित लंबी वार्ता के दौरान जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। प्रारंभिक चरण में कुछ चुनौतियों के कारण वार्ता विफल रही थी और मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा बैठक से बाहर भी चले गए थे, लेकिन बाद में रात में हुई पुन: बैठक में समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जल संसाधन विभाग आगामी 7 दिनों के भीतर नहरों में पानी छोड़ने का एक व्यवस्थित शेड्यूल तैयार करेगा। मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने जानकारी दी कि 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे के बाद पानी छोड़ने की प्रक्रिया का निर्णय औपचारिक रूप से लागू हो जाएगा।

50 करोड़ की लिफ्ट परियोजना से बदलेगी तस्वीर
सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने एक बड़ी सौगात दी है। पांचना बांध क्षेत्र में सिंचाई का दायरा बढ़ाने के लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये की लिफ्ट परियोजना को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही बांध के सुधार कार्यों को भी मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दे दी है।
किसानों के लिए खुशहाली का नया दौर
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि यह समझौता क्षेत्र के किसानों की जीत है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र के विकास और किसानों के हित के लिए जो भी आवश्यक कदम उठाने होंगे, सरकार उसके लिए प्रतिबद्ध है। दोनों समुदायों ने इस सर्वसम्मत निर्णय पर संतोष व्यक्त किया है और मुख्यमंत्री का आभार जताया है। इस समाधान से करौली क्षेत्र में कृषि विकास की नई उम्मीदें जगी हैं।