पाली/रोहट। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है। एसीबी की पाली द्वितीय इकाई की टीम ने रविवार को चिकित्सा विभाग में जाल बिछाकर एक बड़ी ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने रोहट स्थित ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (BCMO) कार्यालय में तैनात संविदा लेखा सहायक (लेखाकार) देवकीनंदन शर्मा को परिवादी से 20,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से चिकित्सा विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया है।
वाहन लगाने और बिल पास करने के एवज में मांगी थी घूस
मिली जानकारी के अनुसार, परिवादी की एक गाड़ी टेंडर के माध्यम से चिकित्सा विभाग (रोहट कार्यालय) में लगी हुई थी। इस गाड़ी को सुचारू रूप से लगाने, उसकी प्रक्रिया पूरी करने और उससे जुड़े बिल व अन्य कार्यों को निपटाने के एवज में संविदा लेखा सहायक देवकीनंदन शर्मा ने 20 हजार रुपए की घूस मांगी थी। परिवादी भ्रष्टाचार के आगे झुकना नहीं चाहता था, इसलिए उसने इसकी लिखित शिकायत सीधे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को कर दी।
एसीबी ने इस तरह बुना जाल (ट्रैप की पूरी कहानी)
शिकायत मिलते ही एसीबी की टीम ने बेहद गोपनीय तरीके से मामले की जांच शुरू की।
- गोपनीय सत्यापन: एसीबी टीम ने सबसे पहले परिवादी की शिकायत का गुप्त रूप से सत्यापन करवाया। सत्यापन के दौरान आरोपी लेखाकार द्वारा 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगने की बात पूरी तरह सही और प्रमाणित पाई गई।
- एएसपी के नेतृत्व में बनी योजना: इसके बाद एसीबी जोधपुर रेंज के उप महानिरीक्षक (DIG) सवाई सिंह गोदारा के निर्देशन में और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पाली द्वितीय इकाई के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) देरावर सिंह के नेतृत्व में एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया।
- रंगे हाथ गिरफ्तारी: तय रणनीति के तहत रविवार को परिवादी को केमिकल लगी हुई रिश्वत की राशि (20,000 रुपए) देकर आरोपी देवकीनंदन के पास भेजा गया। जैसे ही रोहट कार्यालय में आरोपी देवकीनंदन शर्मा ने परिवादी से रिश्वत की रकम स्वीकार की, आसपास छिपी एसीबी की टीम ने तुरंत उसे दबोच लिया।
मौके से राशि बरामद, आगे की जांच शुरू
गिरफ्तारी के तुरंत बाद एसीबी के अधिकारियों ने आरोपी के पास से रिश्वत की पूरी रकम (20,000 रुपए) बरामद कर ली। उसके हाथों को धुलवाने पर केमिकल के कारण रंग बदल गया, जो इस बात का पुख्ता वैज्ञानिक सबूत है कि उसने पैसे छुए थे। टीम ने मौके पर ही सभी जरूरी दस्तावेजी कार्रवाई और पंचनामा तैयार करने की प्रक्रिया पूरी की।
जांच का दायरा बढ़ा: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आरोपी से पूछताछ की जा रही है। एसीबी के सूत्रों के मुताबिक, विभाग इस मामले में ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (BCMO) की भूमिका की भी सघन जांच कर रहा है। इसके साथ ही आरोपी की आय से अधिक संपत्ति और अन्य संभावित घोटालों को लेकर भी सर्च ऑपरेशन चलाया जा सकता है।
आम जनता से एसीबी की अपील
इस बड़ी सफलता के बाद एसीबी के अधिकारियों ने एक बार फिर दोहराया है कि सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ उनका अभियान पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी उनके जायज काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो डरे बिना इसकी सूचना तुरंत एसीबी के हेल्पलाइन नंबर या स्थानीय चौकी पर दें, ताकि भ्रष्ट तंत्र पर नकेल कसी जा सके।