करौली। जिले के गुढ़ाचंद्रजी ब्लॉक में मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (BCMO) का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे दंत चिकित्सक डॉ. जगराम मीना को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 33 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता, बिना आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) पावर के पद के दुरुपयोग तथा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोपों से जुड़ा यह मामला अब जिला प्रशासन की चौखट तक पहुंच गया है।
चिकित्साकर्मियों ने जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि विभागीय जांच पूरी होने और रिपोर्ट विभाग को मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
10 महीने बाद भी जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में
ज्ञापन में सबसे अहम सवाल विभागीय जांच और उस पर हो रही देरी को लेकर उठाया गया है। चिकित्साकर्मियों का कहना है कि:
- इस पूरे प्रकरण की विभागीय स्तर पर जांच पूरी हो चुकी है।
- जांच रिपोर्ट नवंबर 2025 में ही स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को प्राप्त हो चुकी थी।
- इसके बावजूद करीब 10 महीने का समय बीत जाने पर भी कोई अनुशासनात्मक या प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया।
कर्मचारियों का कहना है कि जब जांच पूरी हो चुकी है, तो आखिर फाइल को दबाकर रखने के पीछे किसका दबाव या संरक्षण है?
बिना DDO पावर कार्यभार और कार्यशैली पर गंभीर आरोप
ज्ञापन में डॉ. जगराम मीना की कार्यशैली और कर्मचारियों के प्रति उनके व्यवहार को लेकर भी खुलकर विरोध दर्ज कराया गया है।
- स्टाफ में असंतोष: शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ब्लॉक में पदस्थापित स्टाफ एवं अधीनस्थ कार्मिक BCMO की कार्यप्रणाली से लगातार परेशान और मानसिक दबाव में हैं।
- अतिरिक्त कार्यभार पर सवाल: एक दंत चिकित्सक को महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद का अतिरिक्त कार्यभार लगातार सौंपे रखने पर भी सवालिया निशान लगाए गए हैं।
कर्मचारियों ने कहा कि इस संबंध में पूर्व में भी कई बार ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक लिखित में अवगत कराया गया, लेकिन शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण करने के बजाय मामले को नजरअंदाज किया जाता रहा।
मीडिया में मामला आने के बाद भी विभाग की चुप्पी
चिकित्साकर्मियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि 33 लाख रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला लगातार मीडिया में प्रमुखता से उठाया जा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता और साख पर आंच आ रही है।
चिकित्साकर्मियों द्वारा उठाए गए प्रमुख सवाल:
- विभागीय जांच रिपोर्ट आने के इतने महीनों बाद भी अंतिम निर्णय क्यों नहीं लिया गया?
- क्या डॉ. जगराम मीना से BCMO का अतिरिक्त कार्यभार तुरंत वापस लिया जाएगा?
- कथित 33 लाख रुपये के वित्तीय गबन की जवाबदेही तय कर वसूली कब होगी?
- प्रशासनिक लापरवाही और नियमों के उल्लंघन पर उच्चाधिकारियों का रुख स्पष्ट कब होगा?
कलेक्टर से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग, CMHO ने दिया आश्वासन
शिकायतकर्ताओं ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले में सीधे हस्तक्षेप कर निष्पक्ष व उच्चस्तरीय समीक्षा कराई जाए और जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर त्वरित कानूनी व विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अधिकारियों का पक्ष:
इस पूरे मामले पर करौली के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. सतीश चंद्र मीना ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और नियमों के तहत जो भी विधिक व विभागीय कार्रवाई बनती है, वह निष्पक्ष रूप से अमल में लाई जाएगी।