-एसीबी की चार्जशीट से खुलासा: 93,000 करोड़ की योजना में ‘रिश्वत का कुआं’, सुबोध अग्रवाल सहित 22 रसूखदारों ने मिलकर रचा भ्रष्टाचार का चक्रव्यूह।
-5000 करोड़ का महा-घोटाला, 1000 करोड़ की रिश्वत के लिए जनता की प्यास का सौदा
-महेश जोशी के लिए दलाल संजय बड़ाया जुटाता था फंड
-टेंडर ‘मैनेजिंग’ का गंदा खेल, 20,000 करोड़ की सेटिंग
-960 करोड़ के घोटाले का काला चिट्ठा
राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की चार्जशीट ने वो सच उगल दिया है जिसने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। यह सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि जनता की प्यास बुझाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ‘लूट’ का एक सुव्यवस्थित ढांचा था। राजस्थान के प्रशासनिक और राजनैतिक इतिहास का सबसे बड़ा काला अध्याय अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। ‘EXPOSE NOW’ के पास मौजूद एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, जल जीवन मिशन (JJM) के नाम पर प्रदेश की जनता के हक का 5,000 करोड़ रुपया भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। यह केवल कागजी हेरफेर नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से की गई सरकारी खजाने की डकैती है।
- 20,000 करोड़ की टेंडर ‘हाइजैकिंग’, का खेल
भ्रष्टाचार की इस बिसात पर सबसे पहली चाल ‘टेंडर मैनेजिंग’ के जरिए चली गई।

विजिट सर्टिफिकेट की वसूली:
टेंडर की शर्तों में जानबूझकर ‘साइट विजिट’ की एक ऐसी तकनीकी शर्त जोड़ी गई, जिसका एकमात्र मकसद ईमानदार कंपनियों को बाहर करना था।
कमीशन का गणित:
विभाग के आला इंजीनियरों ने एक ‘सिंडिकेट’ बनाया। केवल उन्हीं फर्मों को विजिट सर्टिफिकेट जारी किए गए, जिन्होंने 5% से 10% एडवांस कमीशन देने का वादा किया। इस तरह ₹20,000 करोड़ के 44 टेंडरों को पूरी तरह हाईजैक कर लिया गया।
- ‘The Ircon Gate’, फर्जी ईमेल और जाली दस्तावेज
घोटाले का सबसे सनसनीखेज पहलू ‘फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र’ का खेल है।
साजिश:
आरोपी पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने मुकेश पाठक के साथ मिलकर केंद्र सरकार की एजेंसी IRCON के नाम पर जाली सर्टिफिकेट तैयार किए।
डिजिटल धोखाधड़ी:
इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए jesircon.mdwit@gmail.com जैसी एक फर्जी ईमेल आईडी बनाई गई। इसी आईडी से खुद ही विभाग को सत्यापन (Verification) मेल भेजा गया।
अधिकारियों की मिलीभगत:
चौंकाने वाली बात यह है कि 13 अप्रैल 2023 को आई इस फर्जी रिपोर्ट पर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने उंगली नहीं उठाई, जिससे साफ है कि ऊपर से नीचे तक सब मिले हुए थे।
- भ्रष्टाचार का ‘त्रिकोण’: मंत्री, आईएएस और दलाल
एसीबी की चार्जशीट ने इस घोटाले के मास्टरमाइंड्स का पूरा खाका खींच दिया है:
संजय बड़ाया (दलाल):
यह इस पूरे सिंडिकेट का ‘फाइनेंशियल मैनेजर’ था। चार्जशीट के अनुसार, बड़ाया तत्कालीन मंत्री महेश जोशी के लिए फंड जुटाने और ठेकेदारों से सेटिंग करने का मुख्य जरिया था।
सुबोध अग्रवाल (रिटायर्ड IAS):

तत्कालीन एसीएस, जिनके रसूख के चलते नियमों को कूड़ेदान में डाल दिया गया। ‘मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट’ में विवादास्पद शर्तें जोड़ना इनके कार्यकाल की सबसे बड़ी अनियमितता मानी गई है।
महेश जोशी (पूर्व मंत्री):

जिनके संरक्षण में यह पूरा ‘भ्रष्टाचार का कुआं’ खोदा गया। दलालों ने मंत्री के नाम का इस्तेमाल कर करोड़ों के वारे-न्यारे किए।
- आंकड़ों में लूट का काला चिट्ठा
विवरण राशि (अनुमानित)
कुल योजना लागत ₹93,000 करोड़
कुल महा-घोटाला ₹5,000 करोड़
फर्जी टेंडर घोटाला (FIR-2) ₹960 करोड़
रिश्वत का कुल लक्ष्य ₹1,000 करोड़
बिना काम भुगतान ₹300 करोड़
फर्जी सर्टिफिकेट का खेल:-
आरोपी पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने मुकेश पाठक के साथ मिलकर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनवाए। इसके लिए ₹16.70 लाख का भुगतान किया गया और बाकायदा एक फर्जी ईमेल आईडी (jesircon.mdwit@gmail.com) बनाकर फर्जी सत्यापन भेजा गया।
93,000 करोड़ रुपये की योजना, जो राजस्थान के दूर-दराज गांवों में पानी पहुँचाने के लिए थी, उसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया। एसीबी ने 22 लोगों को नामजद तो कर लिया है, ‘EXPOSE NOW’ इस घोटाले के हर एक अपडेट पर अपनी नजर रखे हुए है। सच अभी और भी है…
