किसानों के 70 लाख रुपए आपस में बांटे: पूर्व मैनेजर के साथ मिलकर किया घोटाला; को-ऑपरेटिव बैंक का पूर्व MD और कैशियर गिरफ्तार

जैसलमेर में किसानों के क्लेम के 70 लाख रुपए हड़पने वाले दी जैसलमेर सेंट्रल कॉ-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक (एमडी) और कैशियर को शुक्रवार को गिरफ्तार किया है। मामले में आरोपी व्यवस्थापक नरेश कुमार को पुलिस पहले पकड़ चुकी है।
जांच में सामने आया कि पद से हटाए गए व्यवस्थापक और ब्रांच मैनेजर के साथ मिलकर घोटाला किया गया था। क्लेम की राशि सोसाइटी के मुख्य अकाउंट में डालने के बाद उसे चांधन ब्रांच में ट्रांसफर किया गया। किसानों के अकाउंट में राशि डायरेक्ट ट्रांसफर नहीं करके विड्रॉल करने के बाद हड़प लिए।
पकड़े गए पूर्व एमडी जगदीश सुथार वर्तमान में बाड़मेर में उप रजिस्ट्रार हैं, वहीं पूर्व कैशियर विवेक सैन मोहनगढ़ को-ऑपरेटिव मैनेजर है। मामले में चांधन ब्रांच मैनेजर अश्विनी केवलिया की तलाश जारी है।

सिलसिलेवार घोटाले का पूरा घटनाक्रम:-

2020 में फर्जी हस्ताक्षर से घोटाले की शुरुआत-

ASP रेवंतदान ने बताया- साल 2020 में कनोई ग्राम सेवा सहकारी समिति में करीब 70 लाख रुपए की हेराफेरी का मामला सामने आया था। समिति के अध्यक्ष रोजे खान ने आरोप लगाया था कि उनके फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक से बड़ी राशि निकाली गई। जांच में सामने आया कि तत्कालीन एमडी जगदीश सुथार और समिति के व्यवस्थापक नरेश कुमार ने मिलीभगत कर 70 किसानों के कृषि क्लेम की राशि को बांट लिया।
व्यवस्थापक से हटाने के बाद भी भुगतान जारी रखा गया समिति के अध्यक्ष रोजे खान ने गड़बड़ी की आशंका के चलते 30 अगस्त 2020 को व्यवस्थापक नरेश कुमार को पद से हटा दिया था। इसकी सूचना लिखित और मौखिक रूप से जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व एमडी जगदीश सुथार को दी गई थी। इसके बावजूद एमडी ने नियमों को ताक पर रखते हुए कार्यमुक्त किए जा चुके व्यवस्थापक के साथ मिलकर 8 सितंबर को 20 लाख रुपए और 25 सितंबर को 50 लाख रुपए का भुगतान कर दिया।

70 लाख रुपए का दो किस्तों में अनियमित भुगतान-

घोटाले के तहत कुल 70 लाख रुपए की राशि का भुगतान दो किस्तों में किया गया – 8 सितंबर को 20 लाख रुपए और 25 सितंबर को 50 लाख रुपए। इस तरह पूरी राशि का निपटारा नियमों के विपरीत तरीके से किया गया।

मुख्य खाते की जगह दूसरी ब्रांच से लेनदेन-

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कनोई सोसाइटी का मुख्य खाता जैसलमेर शाखा में था, लेकिन षड्यंत्र के तहत भुगतान चांधन ब्रांच से किया गया। इसके साथ ही राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद किसानों के कृषि क्लेम की राशि सीधे उनके ऑनलाइन खातों में ट्रांसफर नहीं की गई और अनियमित तरीके से भुगतान किया गया।

जांच में चार अधिकारी दोषी-

राजस्थान को-ऑपरेटिव एक्ट की धारा 55 और 57 के तहत हुई जांच में तत्कालीन एमडी जगदीश सुथार, व्यवस्थापक नरेश कुमार, चांधन ब्रांच मैनेजर अश्विनी केवलिया और कैशियर विवेक सैन को दोषी पाया गया। मामले में नरेश कुमार पहले से जमानत पर है, जबकि शुक्रवार को जगदीश सुथार और विवेक सैन को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है और अश्विनी केवलिया की तलाश जारी है।

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