EXPOSE NOW: महा-खुलासा (Part-2)- PHED के अफसरों की ‘अंधी’ मेहरबानी, बिना जांच के ठेकेदार की ‘चांदी’, 80 करोड़ का नियम विरुद्ध भुगतान !

मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल का सोम-कमला-अम्बा बांध परियोजना में करोड़ों का ‘खेल’

उदयपुर/जयपुर। राजस्थान के जल जीवन मिशन (JJM) में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक और चौंकाने वाला प्रमाण सामने आया है। Expose Now के पास मौजूद विशेष ऑडिट दस्तावेजों (Audit Note) से खुलासा हुआ है कि उदयपुर के प्रोजेक्ट खंड-द्वितीय में नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदार को 80.30 करोड़ रुपये का अनियमित भुगतान कर दिया गया। दरअसल जल जीवन मिशन के तहत सोम-कमला-अम्बा बांध परियोजना से डूंगरपुर टाउन सहित आसपुर, डोवरा और डूंगरपुर ब्लॉक के 151 गांवों और 244 ढाणियों में 34 हजार से ज्यादा घरों तक घर-घर नल से जल पहुंचाना था। मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल एवं मैसर्स जिओ मिलर को ज्वाइंट वेंचर में इस कार्य का कार्यादेश दिनांक- 22.04.2022 को जारी किया गया था, जिसका कार्य दिनांक 21.07.2023 को पूरा किया जाना था। ऑडिट विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार यह कार्य अगस्त, 2025 में 24 महिने की देरी से चल रहा था और परियोजना का कार्य अधूरा एवं प्रगतिरत था।

80 करोड़ के खेल का क्या है नया खुलासा?

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के अधिशाषी अभियंता कार्यालय (खंड-द्वितीय, उदयपुर) में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। नियमों के मुताबिक, ठेकेदार को भुगतान करने से पहले Third Party Inspection Agency (TPIA), ग्राम पंचायत और विभाग के अधिकारियों द्वारा संयुक्त निरीक्षण (Joint Inspection) करना अनिवार्य है। लेकिन, उदयपुर में अधिकारियों ने इस अनिवार्य प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। दस्तावेजों की जांच से पता चला कि जलदाय विभाग इंजीनियर्स ने ठेकेदार के 8वें चल बिल (Running Bill) तक का भुगतान बिना किसी संयुक्त निरीक्षण साक्ष्य के कर दिया। जो कि जल जीवन मिशन (JJM) मार्गदर्शिका के बिंदु 3.5 (xxxvi) और (xxxviii-छ) का स्पष्ट उल्लंघन है। इंजीनियर्स ने बिना यह जांचे कि सामग्री की गुणवत्ता कैसी है और कार्य मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं, करोड़ों की राशि जारी कर दी गई।

भुगतान का पूरा कच्चा चिट्ठा (टेबल रिपोर्ट)

ऑडिट में पकड़ा गया कुल अनियमित भुगतान 80,29,92,645 रुपये है। इसका विवरण इस प्रकार है:-

बिल संख्या भुगतान राशि (रुपये)

प्रथम 7,90,70,347
द्वितीय 8,44,73,365
तृतीय 8,93,37,910
चतुर्थ 11,25,64,978
पंचम 17,65,01,193
षष्टम 11,61,78,400
सप्तम 10,08,12,404
अष्टम 4,40,54,048

कुल योग 80,29,92,645/-

Expose Now के सुलगते सवाल:-

-कमीशन का गणित: क्या अधिकारियों की जेबें गरम की गई थीं, इसीलिए बिना साक्ष्य के 80 करोड़ की फाइलें दौड़ती रहीं?

-धरातल पर क्या? अगर संयुक्त निरीक्षण नहीं हुआ, तो क्या गारंटी है कि पाइपलाइन सही बिछाई गई है? या फिर पुरानी पाइप लाइनें की एमबी में चढ़ाकर भुगतान उठा लिया गया है, क्या यह पैसा भी मिट्टी में मिलने वाला है?

-बिना गुणवत्ता जांच (Quality Check) के किए गए इस काम की गारंटी क्या है? इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा ठेकेदार या फिर पीएचईडी इंजीनियर्स?

-क्या विभाग के उच्च अधिकारी इस ऑडिट रिपोर्ट पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे या फिर मामले की सौदेबाजी कर दबाने का खेल किया जाएगा?

Expose Now जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के उन अधिकारियों के चेहरों को भी बेनकाब करेगा जिनकी कलम से यह फर्जीवाड़ा हुआ है। उदयपुर संभाग के इस सबसे रसूखदार ठेकेदार जगदीश प्रसाद अग्रवाल और PHED के ‘साहबों’ के बीच का यह गठजोड़ अब Expose Now की रडार पर है। विभाग के इंजीनियर्स की मिलीभगत से कैसे बिना कार्यों की जांच किए ही ठेका फर्म को मिलीभगत से 80 करोड़ से ज्यादा का नियम विरूद्ध भुगतान कर दिया गया? Expose Now पर इस पूरी परियोजनाओं में हुए एक-एक घोटाले का पर्दाफाश लगातार जारी रहेगा।

इस महा-खुलासे की पहली कड़ी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

कल देखिए पार्ट-3: “ठेका फर्म पर जीएसटी की करोड़ों की मेहरबानी”

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