राष्ट्रीय सुरक्षा का महा-चक्रव्यूह: राजस्थान के सरकारी विभागों का डाटाबेस अब सीधे ‘नेटग्रिड’ से जुड़ेगा

जयपुर। देश की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सूचना साझाकरण तंत्र (Information Sharing Mechanism) को अभेद्य, त्वरित और अत्यधिक प्रभावी बनाने की दिशा में राजस्थान सरकार ने एक बड़ा विधिक व रणनीतिक कदम उठाया है। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) भास्कर ए. सावंत ने कहा है कि राज्य के विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों के डाटाबेस को केंद्र सरकार के ‘नेटग्रिड’ (NATGRID) प्लेटफॉर्म से जोड़ने की विधिक प्रक्रिया राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में गेम-चेंजर साबित होगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के आला अधिकारियों और तकनीकी विंग को पाबंद किया है कि वे नेटग्रिड एकीकरण (Integration) से जुड़े तमाम तकनीकी, विधिक और प्रशासनिक कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता के साथ समय-सीमा में पूरा करें।

अतिरिक्त मुख्य सचिव सोमवार को शासन सचिवालय (Secretariat) के कॉन्फ्रेंस हॉल में केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य के विभिन्न विभागों के तकनीकी प्रतिनिधियों के साथ आयोजित एक विशेष उच्च स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से आए नेटग्रिड के संयुक्त सचिव श्री सत्यनारायण गुप्ता, नेटग्रिड के निदेशक श्री राघव गुप्ता, राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (DoIT&C) के आयुक्त श्री हिमांशु गुप्ता तथा गृह विभाग की संयुक्‍त शासन सचिव डॉ. मन्‍जू विजय सहित कई आला विधिक और तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

पहले चरण में इन 4 संवेदनशील विभागों का डेटा होगा सेंट्रलाइज्ड

डेटा शेयरिंग के इस राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रथम चरण (Phase-1) के लिए राज्य के चार सबसे संवेदनशील और राजस्व से जुड़े विभागों का चयन किया गया है। एसीएस भास्कर ए. सावंत ने कार्यशाला में स्पष्ट निर्देश दिए कि:

  • उद्योग और खान विभाग (Industries & Mines): खनन पट्टों, औद्योगिक भूखंडों के आवंटन और बड़े कॉरपोरेट निवेश का डेटा।
  • स्वायत्त शासन (LSG/UDH) एवं ऊर्जा विभाग (Energy): नगरीय निकायों के संपत्ति रिकॉर्ड तथा बिजली कनेक्शन व बड़े विधिक उपभोक्ताओं के विभागीय डाटाबेस को नेटग्रिड के सर्वर से लिंक किया जाएगा।

इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियों, डेटा के निर्धारित विधिक प्रारूपों (Formats) और सुरक्षा प्रोटोकॉल को तुरंत प्रभाव से फाइनल करने के निर्देश दिए गए हैं।

जानिए क्या है नेटग्रिड (NATGRID) और यह कैसे काम करेगा?

तकनीकी और विधिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड यानी नेटग्रिड (NATGRID) भारत सरकार के गृह मंत्रालय की एक बेहद महत्वाकांक्षी और अत्याधुनिक खुफिया डेटा ग्रिड प्रणाली है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की शीर्ष अधिकृत सुरक्षा और जांच एजेंसियों (जैसे IB, RAW, CBI, ED, NIA) को आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग और अंतरराष्ट्रीय अपराधों की विधिक जांच के दौरान रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध कराना है।

एकीकरण की इस जटिल प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए राज्य का सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) मिलकर काम कर रहे हैं। ये दोनों विधिक संस्थाएं मिलकर एक सुरक्षित एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) विकसित करेंगी। इस एपीआई के जरिए राजस्थान के सरकारी सर्वरों में मौजूद डेटा बिना किसी मानवीय दखल और बिना किसी डेटा लीक के खतरे के, सीधे दिल्ली स्थित नेटग्रिड के मुख्य डेटा सेंटर से विधिक रूप से सिंक (लिंक) हो जाएगा।

केंद्रीय संयुक्त सचिव ने समझाया सुरक्षा मॉडल; लंबित कार्य निपटाने की डेडलाइन

कार्यशाला के दौरान नेटग्रिड के केंद्रीय संयुक्त सचिव सत्यनारायण गुप्ता ने इस पूरी अवधारणा और उद्देश्यों का प्रजेंटेशन देते हुए कहा कि राज्यों और उनके विभिन्न विभागों के सक्रिय विधिक सहयोग के बिना इस राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को सौ प्रतिशत अभेद्य नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि डेटा एकीकरण से संदिग्ध गतिविधियों, बेनामी संपत्तियों, अवैध माइनिंग सिंडिकेट्स और देशविरोधी तत्वों की ट्रैकिंग मात्र कुछ ही सेकंड्स में संभव हो सकेगी।

एसीएस सावंत ने कार्यशाला के अंत में कड़ा रुख अपनाते हुए सभी तकनीकी प्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि निर्धारित विधिक प्रारूप में सूचनाएं उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने एनआईसी और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सभी लंबित विधिक कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने की कड़क डेडलाइन जारी की है। इस कार्यशाला में राजस्थान पुलिस, परिवहन विभाग, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) सहित कुल एक दर्जन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी कंसल्टेंट्स मौजूद रहे।

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