जयपुर। किसी भी प्रदेश के लिए इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि जिन बच्चों को विशेष देखभाल और संवेदनशीलता की जरूरत है, उन्हें अपने बुनियादी अधिकारों और न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़े। राजधानी जयपुर में स्थित ‘राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर विद्यालय’ के श्रवण एवं वाणी-बाधित छात्र-छात्राओं का अपनी मांगों को लेकर फिर से सड़क पर उतरना राज्य की प्रशासनिक और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इन विशेष योग्यजन बच्चों ने प्रशासन की पोल खोलते हुए सड़क पर मोर्चा खोल दिया है। जो बच्चे अपनी आवाज़ से अपनी बात नहीं कह सकते, उनकी यह खामोश लड़ाई आज पूरे प्रदेश को झकझोर रही है।
क्या हैं मूक-बधिर बच्चों के गंभीर आरोप?
सड़क पर उतरे इन छात्र-छात्राओं ने सांकेतिक भाषा में अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्हें नारकीय जीवन जीने को मजबूर किया जा रहा है। बच्चों की प्रमुख मांगें और आरोप इस प्रकार हैं:
- जर्जर भवन में जान का जोखिम: स्कूल और हॉस्टल का भवन बेहद जर्जर अवस्था में है, जिससे हर समय हादसे का डर बना रहता है।
- अवैध वसूली के आरोप: छात्रों ने स्कूल और हॉस्टल प्रबंधन पर कथित तौर पर अवैध वसूली करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
- प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव: मूक-बधिर बच्चों के लिए सबसे जरूरी विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों (Special Educators) की भारी कमी है, जिससे पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है।
- हॉस्टल की बदहाली और उत्पीड़न: साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है, साथ ही बच्चों ने मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न की शिकायत भी की है।
विपक्ष का तीखा हमला: “बच्चे नहीं, सरकार मूक-बधिर है”
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। सरकार को घेरते हुए कहा गया है, “अगर जो बच्चे सुन नहीं सकते, बोल नहीं सकते, उन्हें भी न्याय के लिए सड़क पर बैठना पड़े, तो समझिए बच्चे मूक-बधिर नहीं हैं, बल्कि मूक-बधिर प्रदेश की संवेदनहीन भाजपा सरकार है। इस सरकार का प्रशासन बहरा और व्यवस्था पूरी तरह गूंगी हो चुकी है।”
विपक्ष ने इसे राजस्थान की जनता का दुर्भाग्य करार देते हुए कहा कि मूक-बधिर बच्चों को भी अपने अधिकारों के लिए धरने पर बैठना पड़ रहा है। यह दर्शाता है कि मौजूदा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था का क्या हाल कर दिया है। सरकार के लिए इससे बड़ी विफलता और शर्मनाक बात क्या होगी?
सरकार से जवाब तलब: क्या जिम्मेदारी सिर्फ प्रचार तक सीमित है?
प्रदर्शनकारियों और आम जनता ने सरकार से सीधा सवाल किया है कि क्या सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ प्रचार और झूठी बयानबाज़ी करने तक सीमित है? या फिर प्रदेश के दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित करना भी उनका काम है?
तत्काल जांच और ठोस कदम की मांग
दिव्यांग विद्यार्थियों के अधिकारों और उनके भविष्य से जुड़ी इन मांगों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए। इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग से उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है।
