नौ महीने के आंकड़ों में हत्या, लूट और महिला अपराधों में गिरावट, पॉक्सो के 478 और दुष्कर्म के 356 मामले घटे, घरेलू प्रताड़ना की शिकायतें बढ़ीं
जयपुर । राजस्थान में वर्ष 2026 की पहली तीन तिमाहियों के अपराध आंकड़ों में कई अहम बदलाव सामने आए हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में कुल दर्ज अपराधों में कमी आई है। हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, लूट और महिला-बाल अपराधों के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियारों और आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में बढ़ोतरी हुई है। पुलिस इसे अपराधों के खिलाफ तेज कार्रवाई और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम बता रही है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक भारतीय दंड संहिता (भादंसं) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत प्रदेश में 1,47,534 प्रकरण दर्ज हुए थे। वहीं, सितंबर 2026 तक यह संख्या घटकर 1,45,781 रह गई। यानी पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 1,753 मामले कम दर्ज किए गए। गंभीर अपराधों में भी गिरावट दर्ज हुई है। हत्या के 23 और हत्या के प्रयास के 174 मामले कम हुए हैं।

लूट और डकैती पर अंकुश, संपत्ति संबंधी अपराध भी घटे
संपत्ति संबंधी अपराधों के आंकड़ों में भी राहत की तस्वीर सामने आई है। पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले डकैती के मामलों में 19.67 प्रतिशत, लूट में 16.40 प्रतिशत और नकबजनी में 4.63 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। पुलिस के मुताबिक, अपराधियों पर निगरानी, नियमित गश्त और लक्षित कार्रवाई के जरिए इन अपराधों पर नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं।

नशे और हथियारों के खिलाफ कार्रवाई तेज
स्थानीय एवं विशेष कानूनों के तहत दर्ज मामलों में इस बार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2025 में सितंबर तक ऐसे 65,753 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 70,035 हो गई। इस तरह 4,282 प्रकरणों की वृद्धि दर्ज हुई।
एनडीपीएस एक्ट के तहत 1,815 मामले यानी 35.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। आर्म्स एक्ट के तहत 538 मामले यानी 10.17 प्रतिशत और आबकारी अधिनियम के तहत 908 मामले यानी 4.92 प्रतिशत अधिक दर्ज किए गए। पुलिस इन आंकड़ों को मादक पदार्थों, अवैध हथियारों और शराब से जुड़े मामलों में बढ़ी कार्रवाई के रूप में पेश कर रही है। हालांकि, इन मामलों में वृद्धि का वास्तविक आकलन करने के लिए यह देखना भी जरूरी होगा कि बढ़ोतरी कितनी कार्रवाई के कारण हुई और कितनी वास्तविक अपराध गतिविधियों से जुड़ी है।

पॉक्सो के 478 और दुष्कर्म के 356 मामले कम
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के आंकड़ों में भी गिरावट दर्ज की गई है। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 478 यानी 19.20 प्रतिशत की कमी आई। दुष्कर्म के मामलों में 356 यानी 7.96 प्रतिशत और छेड़छाड़ के मामलों में 603 यानी 7.38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
पुलिस के अनुसार, महिला सुरक्षा के लिए संचालित कालिका यूनिट, एंटी रोमियो स्क्वॉड और अन्य अभियानों का इन आंकड़ों में योगदान रहा है। वहीं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में भी 954 की कमी आई, जो 15.47 प्रतिशत है।

घरेलू प्रताड़ना के मामलों में बढ़ोतरी, शिकायतें दर्ज कराने का भरोसा
अपराध के आंकड़ों में एक अलग तस्वीर घरेलू प्रताड़ना, दहेज और पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों की है। वर्ष 2025 में सितंबर तक ऐसे 9,979 मामले दर्ज हुए थे, जबकि वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 10,562 हो गई। यानी 583 अधिक मामले दर्ज किए गए।

पुलिस का मानना है कि महिलाओं में जागरूकता बढ़ने और पुलिस तक पहुंचने के प्रति विश्वास मजबूत होने से शिकायतें दर्ज कराने का सिलसिला बढ़ा है। महिलाओं को सहायता और काउंसलिंग उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक वृत्त स्तर पर एक पुलिस थाने में महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र संचालित किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, वर्ष 2026 के नौ महीनों के आंकड़े अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर कुछ सकारात्मक संकेत देते हैं। हालांकि, दर्ज मामलों में कमी को अपराध में वास्तविक कमी का एकमात्र प्रमाण नहीं माना जा सकता। अपराधों की रोकथाम के साथ शिकायत दर्ज कराने की सहज व्यवस्था, पीड़ितों को त्वरित सहायता और मामलों में प्रभावी अनुसंधान भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।