जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में हुए तबादलों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने विभिन्न विभागों के 468 अफसरों, कर्मचारियों, स्कूल व्याख्याताओं और शिक्षकों के तबादलों पर रोक लगाते हुए संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे 15 दिन के भीतर याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर सुनवाई कर मेरिट के आधार पर उनका निस्तारण करें।
याचिकाकर्ताओं को मिली अंतरिम राहत
जस्टिस समीर जैन की अदालत ने डॉ. महेश मीणा और अन्य की कुल 468 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट की ओर से दी गई यह अंतरिम सुरक्षा केवल उन्हीं अफसरों और कर्मचारियों पर लागू होगी, जिन्होंने अपने तबादलों को अदालत में चुनौती दी थी; इसे प्रदेशभर के सभी तबादलों पर सामान्य रोक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जून महीने में राज्य सरकार द्वारा तबादलों से रोक हटाए जाने के बाद धड़ाधड़ तबादले किए गए थे, जिससे प्रभावित होकर इन शिक्षकों और कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सभी पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया।
15 दिन में आपत्तियों का निस्तारण करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों को कड़ी हिदायत दी है कि वे याचिकाकर्ताओं के ट्रांसफर से जुड़े प्रार्थना पत्रों और आपत्तियों पर अगले 15 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी करें। प्रत्येक मामले की वस्तुस्थिति और मेरिट के आधार पर पारदर्शी तरीके से फैसला लिया जाए। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान याचिकाकर्ताओं के स्थानांतरण आदेशों पर रोक प्रभावी बनी रहेगी। इस कानूनी लड़ाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट संदीप कलवानिया, अशोक बंसल, आशीष सक्सेना, हरेंद्र नील, गिरिराज राजोरिया, कपिल खंडेलवाल और धीरेंद्र सिंह ने पैरवी की।
राजस्थान में बनेगी नई ट्रांसफर पॉलिसी, तीन सदस्यीय कमेटी गठित
तबादलों से जुड़े विवादों के स्थायी समाधान की दिशा में हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य-स्तरीय ट्रांसफर पॉलिसी कमेटी का गठन किया है। इस तीन सदस्यीय कमेटी में निम्नलिखित महानुभाव शामिल हैं:
- माननीय न्यायमूर्ति आलोक शर्मा (पूर्व न्यायाधीश)
- राजस्थान राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General)
- मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार
यह कमेटी निर्णय की तिथि से दो महीने की अवधि के भीतर सरकार के समक्ष एक व्यापक नीति का फ्रेमवर्क तैयार कर प्रस्तुत करेगी। इस नीति में कार्यकाल (tenure), समय पूर्व तबादले, काउंसलिंग, पति-पत्नी (Spouse) के मामले, चिकित्सा व विकलांगता, डार्क जोन/कठिन क्षेत्र, रोटेशन सिद्धांत और शिकायतों के समयबद्ध निवारण जैसे कुल 21 प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे, जिससे भविष्य में बार-बार होने वाली अदालती मुकदमों की आवृत्ति पर लगाम लगाई जा सके।
राजस्थान हाईकोर्ट के तबादलों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले का तृतीय श्रेणी संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक सुनील महला ने स्वागत किया है। महला ने फैसले को कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण बताते हुए इसे न्याय और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम बताया।