जैसलमेर: जैसलमेर जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (DIET) में टीचर ट्रेनिंग के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब जोधपुर हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
27 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
यह जनहित याचिका सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी और शिक्षाविद् सत्य नारायण छंगाणी द्वारा दायर की गई है। इस मामले में रिट की प्रारंभिक सुनवाई 29 सितम्बर को हुई, जिसमें याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हेमंत बल्लानी और जयंत पीथावत ने पैरवी की। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 तय की है।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता के अनुसार, जैसलमेर डाइट में पिछले कुछ वर्षों से शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन में भारी वित्तीय अनियमितताएं बरती जा रही हैं। आरोप है कि कागजों पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम दिखाए गए, जिनमें शिक्षकों ने वास्तव में हिस्सा ही नहीं लिया। इसके अतिरिक्त, जो शिक्षक और कर्मचारी उन दिनों अवकाश पर थे या अपने मूल संस्थानों से अनुपस्थित थे, उन्हें भी ड्यूटी पर दिखाकर वित्तीय लाभ पहुंचाए गए। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों से यह भी सामने आया है कि डायट के तत्कालीन प्रधानाचार्य के नाम पर अलग-अलग फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग करके ड्यूटी आदेश जारी किए गए थे।
आरटीआई के खुलासे से विभाग में हड़कंप
इस पूरे फर्जीवाड़े में सबसे बड़ा खुलासा राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (RSCERT), उदयपुर के एक आरटीआई जवाब से हुआ है। आरएससीईआरटी ने स्पष्ट किया है कि उनके रिकॉर्ड में जैसलमेर डाइट के पिछले चार वर्षों के यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (उपयोगिता प्रमाण पत्र) मौजूद ही नहीं हैं। सरकारी धन का हिसाब न मिलने और अहम दस्तावेज गायब होने से शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति है।
जांच में लीपापोती और प्रशासनिक लापरवाही
याचिका में प्रशासनिक लापरवाही पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत मिलने पर सी.डी.ई.ओ. (CDEO) जैसलमेर ने खुद संयुक्त निदेशक से आग्रह किया था कि मामले की निष्पक्ष जांच किसी अन्य जिले या संभाग स्तर के अधिकारी से करवाई जाए। लेकिन, नियमों की अनदेखी करते हुए उसी जिले की एक स्थानीय समिति को जांच सौंप दी गई। आरोप है कि जांच समिति ने मूल दस्तावेजों से मिलान किए बिना ही मामले में लीपापोती कर दी और आरोपी अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी। इसके साथ ही, अनियमितताओं को उजागर करने वाले शिकायतकर्ता और उनके परिजनों पर दबाव बनाने की कोशिशें भी की गईं।
हाईकोर्ट ने इन अधिकारियों को भेजा नोटिस
मामले की सुनवाई करते हुए माननीय न्यायाधीश ने राज्य सरकार के प्रमुख शासन सचिव (स्कूली शिक्षा), प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशक, आरएससीईआरटी, संयुक्त निदेशक और डाइट प्रिंसिपल सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष और गहन जांच होती है, तो सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले कई बड़े अधिकारियों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।