करौली: बाल अधिकारिता विभाग के अधीन संचालित राजकीय शिशु गृह के प्रयासों से एक जरूरतमंद और परित्यक्त बालिका को सभी वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप दत्तक ग्रहण (Adoption) के माध्यम से एक योग्य दंपती को सुपुर्द कर दिया गया है। इस पहल से एक बार फिर साबित होता है कि सही मार्गदर्शन और कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्चों को एक सुरक्षित और प्यार भरा माहौल दिया जा सकता है।
दत्तक ग्रहण प्रक्रिया और समिति की भूमिका
बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक पवन कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रत्येक शिशु को परिवार का प्यार, सुरक्षा और सम्मान मिलना उसका मूल अधिकार है।
- दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया के दौरान मिशन वात्सल्य पोर्टल से चयनित माता-पिता समिति के समक्ष उपस्थित हुए।
- समिति के अध्यक्ष पवन कुमार गुप्ता और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बत्तीलाल मीणा द्वारा दंपتی के समस्त दस्तावेजों और वस्तुस्थितियों की बारीकी से जांच की गई, जिसके बाद उन्हें योग्य घोषित किया गया।
शिशुओं के सुरक्षित परित्याग की अपील
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने समाज से अपील करते हुए कहा कि यदि कोई माता-पिता या संरक्षक किसी बच्चे का परित्याग करना चाहते हैं, तो वे उसे किसी नजदीकी पालना गृह में छोड़ सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से आग्रह किया कि किसी भी नवजात शिशु को सड़क, झाड़ियों या कूड़ेदान में न फेंका जाए। सुरक्षित परित्याग करने वाले ऐसे माता-पिता या संरक्षक की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
शिशु गृह में बच्चों की बेहतरीन देखभाल
शिशु गृह के मैनेजर प्रवीण कुमार गुर्जर ने बताया कि संस्थान में रहने वाले प्रत्येक शिशु की स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, और भावनात्मक विकास का विशेष ध्यान रखा जाता है। जब कोई बच्चा स्थायी परिवार का हिस्सा बनता है, तो वह पूरे संस्थान के लिए अत्यंत हर्ष और संतोष का क्षण होता है। इस अवसर पर बाल कल्याण समिति के सदस्य फजले अहमद, दिलीप कुमार मीणा सहित शिशु गृह के अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे।