जयपुर/बीकानेर। राजस्थान के शिक्षा विभाग में वर्षों से चल रहे स्कूल व्याख्याताओं के वरिष्ठता (Seniority) विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत द्वारा एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) खारिज किए जाने के बाद अब प्रदेश के करीब 6,000 उप प्राचार्यों (वाइस प्रिंसिपल) का डिमोशन तय हो गया है। वे रिवर्ट होकर दोबारा व्याख्याता (Lecturer) बनेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख:-
न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की पीठ ने हाईकोर्ट के 8 जुलाई 2026 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘राजस्थान शिक्षा (राज्य एवं अधीनस्थ) सेवा नियम-2021’ के नियम-36 (1) और 10 अक्टूबर 2002 की अधिसूचना के तहत RPSC द्वारा लिखित व साक्षात्कार अंकों के आधार पर तैयार मेरिट के क्रम में ही एकीकृत (Composed) वरिष्ठता तय की जाएगी।
विवाद की मुख्य जड़, नियम 36 का गलत क्रियान्वयन:
-जॉइनिंग डेट बनाम मेरिट: 2015 की प्राध्यापक भर्ती में शिक्षा विभाग ने RPSC मेरिट को नजरअंदाज कर पदभार ग्रहण (जॉइनिंग) की तारीख को वरिष्ठता का आधार बना दिया था।
-प्रतिभाशाली शिक्षकों को नुकसान: छोटे विषयों के परिणाम जल्दी आने से कम अंक पाने वाले शिक्षक समय पर जॉइनिंग पाकर 2016-17 की सूची में सीनियर बन गए, जबकि बड़े विषयों के टॉपर्स प्रशासनिक देरी के कारण जूनियर हो गए।
-प्रभावित भर्तियां: वर्ष 2013, 2015 और 2018 की भर्तियों के करीब 11,000 व्याख्याता इस विसंगति से सीधे प्रभावित हुए हैं।
सरकारी खजाने पर अतिरिक्त भार और विभाग की लापरवाही:-
डीपीसी के बाद शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को नए पदों पर पदस्थापित करने के बजाय ‘यथास्थान’ जॉइन कराकर उच्च पे-स्केल देना शुरू कर दिया था। पिछले 40 महीनों में 16,248 कार्मिकों को बिना नए पद का कार्यभार संभाले 178.56 करोड़ रुपये का बढ़ा हुआ वेतन बांटा गया, जिससे सरकार पर हर महीने 8.12 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ रहा था।
अब नए सिरे से होगी शिक्षकों की DPC:-
कोर्ट के आदेश के बाद अब माध्यमिक शिक्षा विभाग (बीकानेर) को सभी स्तरों की पुरानी वरिष्ठता सूचियों को रद्द कर पारदर्शी कॉमन सीनियरिटी लिस्ट बनानी होगी। इसके बाद ही रिव्यू डीपीसी (Review DPC) कर नए सिरे से पदोन्नति और नोशनल पे-फिक्सेशन के लाभ दिए जाएंगे।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now