जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के माणक चौक थाना इलाके से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा के निर्देशन में पुलिस ने पुराने भवन को तोड़े जाने के दौरान मिले गुप्त खजाने के रहस्य का आखिरकार पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने खजाने को चोरी कर खुर्द-बुर्द करने वाले पाँच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके कब्जे से 66.400 किलोग्राम चांदी की सिल्लियां बरामद की हैं।

किन-किन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी?
पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपियों में मुख्य मास्टरमाइंड ठेकेदार सहित उसके साथी शामिल हैं:
- महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू (ठेकेदार एवं मास्टरमाइंड)
- जगदीश राजोरिया
- ओमप्रकाश खींची
- अनुज अरोड़ा
- रजनी मल्होत्रा
कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा?
घटना के अनुसार, परिवादी राहुल सेठी का परिवारिक भवन नंबर 630, विद्याधर का रास्ता, त्रिपोलिया बाजार, जयपुर में स्थित है, जिसे तोड़कर नया भवन बनाने के लिए ‘डिवाइन-1 एलएलपी’ के माध्यम से एग्रीमेंट किया गया था। यह तुड़ाई का कार्य ठेकेदार महेश मल्होत्रा को दिया गया था। काम शुरू होने से पहले ही परिवादी ने स्पष्ट कर दिया था कि भवन तोड़ने पर यदि कोई मूल्यवान संपत्ति या धन निकलता है, तो वह परिवादी को सौंपा जाएगा।
लेकिन लालच में आकर ठेकेदार महेश मल्होत्रा और उसके साथियों ने करीब 1 साल पहले खजाने को चोरी कर आपस में बांट लिया। ठेकेदार ने अनुज, जगदीश, रजनी और ओमप्रकाश को 300-300 चांदी के सिक्के बांट दिए। चोरी के इस माल से मास्टरमाइंड महेश मल्होत्रा ने अपनी जेसीबी की किस्त चुकाई और एक ट्रैक्टर खरीद लिया, वहीं आरोपी जगदीश ने अपनी बेटी की शादी कर डाली।
शराब के नशे में खुली पोल और मुखबिर तक पहुंची बात
आरोपियों को लगता था कि इस राज का कभी पता नहीं चलेगा, लेकिन आरोपी अनुज अरोड़ा और रजनी मल्होत्रा शराब पीने के आदी थे। नशे की हालत में दोनों के बीच हुई खटपट के दौरान खजाना मिलने की बात उनके मुंह से निकल गई। यह बात धीरे-धीरे मोहल्ले में रहने वाले पुलिस के एक मुखबिर तक जा पहुंची। जब परिवादी राहुल सेठी को इसकी भनक लगी और वह ठेकेदार के पास गया, तो आरोपियों ने उसे भगा दिया।
पुलिस की शुरुआती सुस्ती और SOG/IPS का दखल
परिवादी राहुल सेठी जब माणक चौक थाने पहुंचा, तो पुलिस ने 6 महीने तक इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और इसे झूठा मानती रही। परिवादी की शिकायत के अनुसार, खजाने में 15 सोने के कलश, करीब 45 किलो चांदी, 10,000 पुराने चांदी के सिक्के और अन्य बहुमूल्य सामान था।

स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने पर परिवादी SOG मुख्यालय पहुंचा, जहाँ तैनात एक आईपीएस अधिकारी के दखल के बाद आखिरकार 15 जुलाई 2026 को माणक चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। मामला दर्ज होने के बाद नॉर्थ स्पेशल टीम (DST) प्रभारी दिलीप सोनी ने तफ्तीश शुरू की और आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर चांदी की सिल्लियां बरामद कर लीं। फिलहाल सभी आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और पुलिस उनसे सोने के कलश व अन्य बहुमूल्य संपत्तियों के बारे में पूछताछ कर रही है।
