जयपुर/बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित 11वीं-12वीं शताब्दी का ऐतिहासिक किराडू मंदिर समूह, जिसे अपनी अद्भुत मारू-गुर्जर वास्तुकला के कारण ‘राजस्थान का खजुराहो’ कहा जाता है, इन दिनों दो कारणों से चर्चा में है। एक तरफ सरकार ने इसके संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए 5.43 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट आवंटित किया है, तो दूसरी तरफ इसी विकास के जश्न में किए गए एक कृत्य ने प्राचीन धरोहर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Expose Now की पड़ताल में यह सामने आया है कि ऐतिहासिक धरोहर के विकास के नाम पर सोशल मीडिया पर भ्रामक आंकड़े फैलाए जा रहे थे।

किराडू में आतिशबाजी: विरासत को जोखिम, AMASR एक्ट का उल्लंघन
सच्चाई जानने के लिए Expose Now ने पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के निदेशक डॉ. पंकज धरेन्द्र से की Exclusive बातचीत :

- Expose Now: “किराडू में विकास के जश्न के नाम पर मंदिर परिसर में आतिशबाजी की गई, जो हेरिटेज साइट्स के लिए बेहद नुकसानदेह है। इस पर आप क्या कहेंगे?”
- डॉ. पंकज धरेन्द्र: “यह बात सही है कि जो हमारे मॉन्यूमेंट्स हैं, उन पर हमारे एक्ट के हिसाब से आतिशबाजी नहीं हो सकती। ग्रामीणों ने खुशी में ऐसा किया है, लेकिन हम आगे के लिए उन्हें निर्देश देंगे कि स्मारक के समीप ऐसी गतिविधि न करें।”
- Expose Now: क्या इस नियम के उल्लंघन पर कोई एक्शन लिया जाएगा?
- डॉ. पंकज धरेन्द्र: “किसी समूह पर एक्शन लेना कठिन है। हमने वहां के अधीक्षक इमरान अली को निर्देश दिए हैं कि वे मौके पर जाकर ग्रामीणों को समझाइश करें और संदेश दें कि ऐसी आतिशबाजी दोबारा न हो।”
- Expose Now: मंदिर के विकास को लेकर विभाग की आगे की क्या योजना है?
- डॉ. पंकज धरेन्द्र: “किराडू के लिए आए बजट के लिए हमने एक विभागीय समिति गठित की है। यह समिति मौका निरीक्षण कर वहां कराए जाने वाले कार्यों की सूची तैयार करेगी, जिसके आधार पर एस्टीमेट बनाकर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।”
- Expose Now: सोशल मीडिया पर 543 करोड़ के बजट का दावा किया जा रहा है, क्या यह सच है?
- डॉ. पंकज धरेन्द्र: “मेरी जानकारी के अनुसार यह 543 करोड़ नहीं है, यह 5 करोड़ 43 लाख रुपये (5.43 करोड़) ही है। आज मैं घर पे हूं इसलिए एग्जैक्ट आपको कंफर्म डिजिट मैं तो देख के बता सकता हूं, लेकिन यह 5.43 करोड़ ही होगा। 543 करोड़ नहीं हो सकता”।
क्या कहता है कानून? (AMASR Act, 1958)
किराडू मंदिर 11वीं-12वीं सदी की अद्भुत ‘मारू-गुर्जर’ वास्तुकला का प्रतीक है। पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्मारक को प्राचीन संस्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम (AMASR Act, 1958) के तहत संरक्षण प्राप्त है।

- निषिद्ध क्षेत्र (Prohibited Area): अधिनियम के तहत किसी भी संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के दायरे में आतिशबाजी, पटाखे जलाना या प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियां पूर्णतः प्रतिबंधित हैं।
- संरक्षण को खतरा: पटाखों के धुएं से निकलने वाली कालिख (Carbon deposition) प्राचीन पत्थरों और नक्काशी को स्थायी रूप से मलिन (discoloration) कर देती है।
- कंपन (Vibrations): तेज विस्फोटों से उत्पन्न कंपन प्राचीन संरचनाओं में सूक्ष्म दरारें पैदा कर सकते हैं, जिससे मंदिर के मूल ढांचे को भारी नुकसान पहुँच सकता है।
Expose Now का तर्क : विकास और पर्यटन को बढ़ावा देना स्वागत योग्य है, लेकिन “विरासत भी, विकास भी” के नारे को चरितार्थ करने के लिए यह अनिवार्य है कि हम अपनी धरोहरों के प्रति संवेदनशील रहें और पुरातत्व कानूनों का सम्मान करें। किराडू मंदिर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली वास्तुकला की पहचान है, जिसे सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
