सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरे राज्य कर्मचारी: मांगे नहीं मानी तो होगा लंबा आंदोलन, सरकार को अल्टीमेटम

जयपुर: राजस्थान सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदेश भर के सरकारी कर्मचारियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के बैनर तले कर्मचारियों ने लगातार कार्य बहिष्कार कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रदेश के अधिकांश जिलों और सरकारी विभागों में कर्मचारियों ने 1 घंटे का सामूहिक कार्य बहिष्कार कर सांकेतिक प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

इन प्रमुख मांगों को लेकर है आक्रोश

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ के आह्वान पर हुए इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने सरकार पर उनके हितों पर कुठाराघात करने का आरोप लगाया। कर्मचारी नेता रवी शर्मा, फतेहबहादुर और पवन कुमार ने संयुक्त रूप से बताया कि सरकार कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और सुविधाओं में लगातार कटौती कर रही है।

कर्मचारियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं:

  • RGHS का निजीकरण: आरजीएचएस (RGHS) योजना का निजीकरण तुरंत रोका जाए।
  • सरेंडर लीव का भुगतान: समर्पित अवकाश (सरेंडर लीव) के भुगतान पर लगी अघोषित रोक को तुरंत हटाया जाए।
  • संविदा कर्मियों का नियमितीकरण: बजट घोषणाओं को पूरा करते हुए संविदा और ठेका कर्मियों को नियमित किया जाए।
  • 25 सूत्रीय मांग पत्र: विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने और पदोन्नति सहित महासंघ के 25 सूत्रीय मांग पत्र को लागू किया जाए।

सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

इस सामूहिक कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन में विभिन्न कर्मचारी संगठनों और जिलों के प्रमुख पदाधिकारियों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। महासंघ के पदाधिकारी शेर सिंह यादव और देवेन्द्र नरूका ने सरकार की कर्मचारी-विरोधी नीतियों की घोर निंदा की।

कर्मचारी नेताओं ने सरकार को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए 25 सूत्रीय मांग पत्र पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन लंबा और उग्र होगा। भविष्य में होने वाले किसी भी तरह के कामकाज के नुकसान की समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी।

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