जयपुर: ऑफिस में सामान्य रूप से काम चल रहा है। कंप्यूटर की स्क्रीन पर अकाउंटेंट पेमेंट की एंट्री कर रहा है। तभी मोबाइल पर कंपनी के बॉस का WhatsApp मैसेज आता है-“तुरंत पेमेंट करना है. बेहद जरूरी ट्रांजेक्शन है. अभी फंड ट्रांसफर कीजिए।” मैसेज पढ़ते ही कर्मचारी बिना ज्यादा सवाल किए आदेश मान लेता है और कुछ ही मिनटों में लाखों-करोड़ों रुपए कंपनी के खाते से निकल जाते हैं। बाद में जब असली बॉस से बात होती है तो पता चलता है कि उन्होंने ऐसा कोई मैसेज भेजा ही नहीं था।
यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि साइबर अपराध की दुनिया का नया और बेहद खतरनाक सच है, जिसे ‘बॉस स्कैम’ (Boss Scam) नाम दिया गया है। राजस्थान में इस तरह के मामलों में कॉरपोरेट खातों से ढाई करोड़ से लेकर 2.76 करोड़ रुपए तक की ठगी के बड़े मामले सामने आ चुके हैं। इसे लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने कंपनियों और कर्मचारियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है।
पहले जासूसी, फिर बॉस की भाषा की नकल
इस साइबर ठगी में अपराधी सीधे बैंक खाते पर हमला करने के बजाय पहले कंपनी के अंदर की पूरी जानकारी जुटाते हैं। वे यह पता लगाते हैं कि कंपनी का मालिक कौन है, बॉस का मोबाइल नंबर क्या है, अकाउंटेंट कौन है और फाइनेंस विभाग में पेमेंट करने की जिम्मेदारी किसके पास है।
इसके बाद कर्मचारी के सिस्टम (लैपटॉप/कंप्यूटर) या मोबाइल में ई-मेल, संदिग्ध लिंक, ZIP फाइल, APK या अन्य सॉफ्टवेयर के जरिए मालवेयर पहुंचाया जाता है। जैसे ही कर्मचारी फाइल खोलता है, ठगों को WhatsApp Web और बातचीत के पैटर्न तक पहुंच मिल जाती है। इसके बाद वे बॉस के बात करने के अंदाज, शब्दों के चयन और निर्देश देने के तरीके की पूरी नकल कर फर्जी मैसेज तैयार करते हैं।
600 सेकंड में बदल सकता है खेल
राजस्थान साइबर क्राइम के डीआईजी शांतनु कुमार सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी फर्जी बॉस या फर्जी नियामक संस्था बनकर कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं। ठगी के बाद रकम को विभिन्न खातों से होते हुए डिजिटल करेंसी या USDT में बदल दिया जाता है, जिससे उसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है। पुलिस इसे केवल बैंक फ्रॉड नहीं बल्कि कंपनी की डिजिटल सुरक्षा पर सीधा हमला मान रही है।
‘बॉस स्कैम’ से बचने के लिए अपनाएं ये 5 जरूरी उपाय
- तुरंत पेमेंट न करें: किसी भी अचानक आए वित्तीय आदेश पर बिना सोचे-समझे पैसे ट्रांसफर न करें।
- सीधे फोन कर पुष्टि करें: बॉस के उसी WhatsApp चैट पर जवाब देने के बजाय उनके आधिकारिक नंबर पर कॉल करके निर्देश की पुष्टि करें।
- संदिग्ध फाइलों से बचें: अनजान लिंक, ZIP, APK या सॉफ्टवेयर फाइलों को बिल्कुल न खोलें।
- Linked Devices की जांच करें: समय-समय पर अपने WhatsApp के Linked Devices की जांच करते रहें और अनजान डिवाइस को तुरंत लॉगआउट करें।
- टू-लेवल वेरिफिकेशन (Two-Level Verification): बड़े भुगतानों के लिए कंपनी में दो अधिकारियों की मंजूरी की प्रक्रिया अनिवार्य करें।
ठगी होने पर क्या करें?
यदि कोई इस प्रकार की ठगी का शिकार हो जाता है, तो चुप्पी साधना सबसे बड़ी गलती है। राजस्थान पुलिस ने अपील की है कि फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा राजस्थान पुलिस की ओर से विशेष हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 भी जारी किए गए हैं।
साइबर ठग अब बैंक के पासवर्ड चुराने के बजाय कंपनी के ‘भरोसे’ पर वार कर रहे हैं। इसलिए अगली बार मोबाइल पर बॉस का मैसेज आए तो अंगुलियां बैंकिंग ऐप की ओर बढ़ाने से पहले एक बार फोन जरूर लगाएं— “आपका एक कॉल करोड़ों रुपए बचा सकता है।”