जयपुर में ‘दलाल राज’? अपनी ही सरकार में एड़ियां रगड़ रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता; मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए ‘दलाल’ नहीं किया, तो मिली ‘तारीख पे तारीख’

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प्रतिकात्मक चित्र

जयपुर: कहते हैं कि ‘दीपक तले अंधेरा’ होता है, लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर के सांगानेर में तो पूरा का पूरा ‘पावर हाउस’ ही अंधेरे में डूबा नजर आ रहा है। प्रदेश में ‘डबल इंजन’ की सरकार है और दावा ‘सुशासन’ का है, लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी दफ्तरों का इंजन बिना ‘दलाली के तेल’ के इंच भर भी आगे नहीं खिसकता।

इस बार सिस्टम की बेशर्मी का शिकार कोई आम आदमी नहीं, बल्कि सत्ताधारी पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और जाने-माने वकील कैलाश नाथ भट्ट (Kailash Nath Bhatt) हुए हैं।

बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं के करीबी रहे हैं भट्ट

कैलाश नाथ भट्ट भैरोंसिह सरकार में AAG रहे थे इसके साथ ही भाजपा के वरिष्ठ नेता हरिशंकर भाभड़ा, ललित किशोर चतुर्वेदी, भंवरलाल शर्मा, वसुंधरा राजे, ओम माथुर जैसे दिग्गज नेताओं के साथ पार्टी में कई पदों पर काम किया। ओम माथुर तथा अशोक परनामी के समय पार्टी में प्रवक्ता भी रहे।

बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं के करीबी रहे हैं भट्ट

‘साहब’ बीजेपी के नेता हैं, लेकिन सिस्टम के लिए सिर्फ एक ‘फाइल’

मामला मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र सांगानेर (Sanganer) का है। कैलाश नाथ भट्ट के बड़े भाई का निधन 3 दिसंबर, 2025 को हुआ था। एक परिवार जो अपने प्रियजन को खोने के गम में डूबा है, उसे सिस्टम सांत्वना देने के बजाय सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगवा रहा है। भट्ट ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा (वेदना) जाहिर करते हुए सिस्टम की पोल खोल दी। उन्होंने लिखा कि मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) जैसी बुनियादी चीज के लिए उन्हें और उनकी भाभीजी को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यहाँ तक कि श्मशान के कर्मचारियों को भी परेशान किया जा रहा है।

कसूर सिर्फ इतना की बस ‘दलाल’ नहीं किया!

कैलाश नाथ भट्ट ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनकी गलती सिर्फ इतनी है कि उन्होंने किसी ‘दलाल’ (Broker) का सहारा नहीं लिया। सोचिए, जिस प्रदेश में मुख्यमंत्री खुद भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करते हों, उसी मुख्यमंत्री के विधानभा क्षेत्र में नगर निगम के बाबू और अधिकारी बिना दलाल के कागज हिलाने को तैयार नहीं हैं। यह घटना बताती है कि निगम में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उन्हें इस बात का भी खौफ नहीं कि सामने खड़ा व्यक्ति सत्ताधारी दल का वरिष्ठ नेता है।

आम आदमी का क्या होता होगा?

यह सवाल अब हर किसी की जुबान पर है। जब एक वकील और वरिष्ठ नेता, जिसकी सरकार सत्ता में है, उसे एक मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए एड़ियां रगड़नी पड़ रही हैं, तो उस आम आदमी का क्या हाल होता होगा जिसकी न कोई पहुंच है और न ही जेब में रिश्वत देने के लिए पैसा?

  • सिस्टम का संदेश साफ़ है: आप चाहे कोई भी हों, अगर काम करवाना है तो ‘चैनल’ (दलाल) से आइये, वरना नियम-कायदों की भूलभुलैया में भटकते रहिये।

सांगानेर निगम: ‘भ्रष्टाचार का अड्डा’?

सांगानेर नगर निगम कार्यालय अपनी ‘खास’ कार्यशैली के लिए बदनाम होता जा रहा है। भट्ट का ट्वीट/पोस्ट कोई शिकायत नहीं, बल्कि उस ‘सिस्टम’ के गाल पर तमाचा है जो दावा करता है कि “हम बदल गए हैं”। हकीकत यह है कि चेहरा बदला है, सरकार बदली है, लेकिन दफ्तरों में बैठे ‘काली भेड़ों’ का चरित्र नहीं बदला।

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