अस्पताल प्रशासन की क्रूर लापरवाही बेनकाब: 7 दिनों तक मामले को दबाए बैठा रहा पीबीएम मैनेजमेंट

बीकानेर। राजस्थान की चिकित्सा व्यवस्था और सरकारी दावों की कलई खोल देने वाली एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाली खबर बीकानेर संभाग के सबसे बड़े पीबीएम (PBM) अस्पताल से सामने आई है। अस्पताल के जनाना विंग (मटरनिटी वार्ड) के ऑपरेशन थिएटर (OT) में फैले कथित जानलेवा बैक्टीरियल इन्फेक्शन की मार के कारण सिजेरियन डिलीवरी (सिजेरियन ऑपरेशन) कराने आई 6 प्रसूताओं (New Mothers) की दोनों किडनियां पूरी तरह से खराब हो गई हैं। सभी पीड़ित महिलाओं की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है और वे जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए आईसीयू (ICU) में भर्ती हैं, जहां लगातार उनकी डायलिसिस (Dialysis) की जा रही है।

अस्पताल के भीतर फैली इस विधिक लापरवाही की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फलोदी की रहने वाली महज 20 वर्षीय प्रसूता प्रीति की हालत सबसे गंभीर है और उन्हें वेंटिलेटर (Ventilator) सपोर्ट पर रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार, सभी पीड़ित महिलाओं की उम्र बेहद कम, यानी 20 से 27 साल के बीच है, जो अपने नवजात शिशुओं को गोद में लेने के बजाय इस वक्त अस्पताल के बिस्तर पर बेसुध पड़ी हैं।

इनसाइड स्टोरी: 7 दिनों तक सच को फाइलों के नीचे दबाए बैठी रही डॉक्टरों की लॉबी

पीबीएम अस्पताल प्रशासन पिछले 5 से 7 दिनों तक इस पूरे विधिक और जानलेवा मामले को दबाने और इस पर पूरी तरह लीपापोती करने की कोशिशों में जुटा रहा। जब जनाना वार्ड में एक के बाद एक महिलाओं को पेशाब आना बंद हुआ और उनमें ‘एक्यूट किडनी इंजरी’ (AKI) के विधिक लक्षण खतरनाक स्तर पर दिखने लगे, तब जाकर अस्पताल के गलियारों में खलबली मची। इस विधिक लापरवाही के सार्वजनिक होने के बाद सरदार पटेल (SP) मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने आनन-फानन में एक आंतरिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच कमेटी का गठन किया है।

जोधपुर से बुलाई गई फॉरेंसिक माइक्रोबायोलॉजी टीम; जनाना वार्ड सील करने की नौबत

मामले की गंभीरता और मानवाधिकार हनन की पराकाष्ठा को देखते हुए राज्य सरकार के निर्देश पर जोधपुर मेडिकल कॉलेज से विशेषज्ञों की एक हाई-टेक ‘माइक्रोबायोलॉजी टीम’ विशेष विधिक जांच के लिए तत्काल बीकानेर के लिए रवाना की गई है। यह विधिक टीम पीबीएम अस्पताल के जनाना विंग, लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर की दीवारों, सर्जिकल उपकरणों और दवाओं के सैंपल (Swab Samples) लेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन सा घातक बैक्टीरिया या सुपरबग (Superbug) प्रसूताओं के शरीर में प्रवेश कर उनकी किडनियों को फेल कर रहा है।

प्रिंसिपल का तर्क: ’90 सेकंड’ में इन्फेक्शन पकड़ने वाला डिटेक्टर लगाने का दावा

इस पूरे चिकित्सा संकट पर एसपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने अपना विधिक पक्ष रखते हुए कहा, “प्रसूताओं में सिजेरियन के बाद ‘एक्यूट किडनी इंजरी’ होने के कई मेडिकल कारण हो सकते हैं, लेकिन हम वार्ड और ओटी में इन्फेक्शन होने की संभावना से बिल्कुल भी इनकार नहीं कर रहे हैं।” अपनी प्रशासनिक कमियों को छुपाने और भविष्य की तैयारियों का हवाला देते हुए प्रिंसिपल ने दावा किया कि अस्पताल में अब एक अत्याधुनिक ‘इन्फेक्शन डिटेक्टर’ लगाने की विधिक प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जो मात्र 90 सेकंड के भीतर किसी भी वार्ड में मौजूद अदृश्य और खतरनाक बैक्टीरिया का विधिक पता लगा सकता है।

लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या 6 माताओं की जिंदगी दांव पर लगने और उनके परिवारों के उजड़ने के बाद ही इस तरह के सुरक्षा उपकरण याद आते हैं? वर्तमान में पीड़ित परिवारों के रोने-बिलखने से पीबीएम अस्पताल का माहौल बेहद गमगीन है और परिजनों ने दोषी डॉक्टरों और वार्ड प्रभारियों के खिलाफ विधिक रूप से कड़ी आपराधिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की मांग की है।

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