Astrology Predictions On Agnikand: क्या आपने गौर किया है कि अचानक देश और दुनिया में आग लगने की घटनाएं काफी ज्यादा बढ़ गई हैं। कहीं शॉर्ट सर्किट, चलती गाड़ियों में आग, फैक्ट्री ब्लास्ट, बड़े मॉल एवं जंगलों में आग और कही विस्फोट की घटनाएं भी देखने को मिल रही हैं। क्या इसके पीछे सिर्फ इत्तेफाक या भयंकर गर्मी अथवा लापरवाही है या कुछ ग्रहों विशेष कर मंगल, राहु एवं केतु का बड़ा खेल भी हो सकता है।
अग्नि तत्व की राशियां और संवत्सर का प्रभाव
ज्योतिष के अनुसार जब भी गोचर से अग्नि तत्व की राशियों यानि कि मेष, सिंह और धुन में पाप या क्रूर ग्रह आकर बैठते हैं या उन्हें देखते हैं तो धरती पर तापमान अचानक बढ़ता है और शॉर्ट सर्किट, ब्लास्ट, जंगलों और चलती गाड़ियों में आग एवं घरों के साथ ही फैक्ट्री आदि में भी आगजनी की घटनाएं देखने को मिलती हैं। संवत्सर की बात करें तो इस संवत्सर का मंत्री भी मंगल ग्रह है। जब किसी संवत्सर का स्वामी या मंत्री सूर्य अथवा मंगल ग्रह होता है तो उस वर्ष गर्मी का अत्यधिक प्रकोप देखने को मिलता है।

आगजनी में विभिन्न ग्रहों की बड़ी भूमिका
● मंगल ग्रह की बड़ी भूमिका- ज्योतिष में मंगल ग्रह को अग्नि, ऊर्जा, बारूद, युद्ध, विस्फोट, दुर्घटनाये, हथियार, मशीन और अचानक हादसों का ग्रह माना जाता है। मंगल अशुभ स्थिति में हो या फिर राहु, केतु, शनि अथवा सूर्य जैसे पाप या उग्र ग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट हो तो ऐसी स्थिति में आग लगने की घटनाएं, बिजली गिरना, मशीनों की खराबी, गैस रिसाव, विस्फोट, फैक्ट्री में आग, हद से ज्यादा गर्मी एवं अग्नि का प्रकोप साथ ही युद्ध जैसी स्थितियां भी देखने को मिल सकती है। वर्तमान समय में केतु ग्रह मंगल को पूर्ण दृष्टि से देखकर अंगारक योग बना रहा है और यह मंगल ग्रह भी अग्नि तत्व की अपनी ही मेष राशि में 20 जून तक गोचर करता रहेगा।
● राहु ग्रह- राहु धुंआ और जहरीली गैस है। यह आग में घी या हवा का काम करता है। जिससे आग बेकाबू हो जाती है। राहु ग्रह के कारण अचानक हादसे, केमिकल ब्लास्ट और रहस्यमयी आगजानी की घटनाएं भी देखने को मिलती हैं। वर्तमान समय में राहु अपने ही शतभिषा नक्षत्र में गोचर कर रहा है। जिससे इन घटनाओं की संभावना काफी बढ़ गई है।
● केतु ग्रह- केतु अचानक होने वाले ब्लास्ट और शॉर्ट सर्किट का कारण है। इसके कारण धुंआ, अचानक फैलने वाली आग, आगजनी को लेकर अनहोनी और बड़े ब्लास्ट भी देखने को मिलते हैं। अभी केतु ग्रह भी अपने ही मघा नक्षत्र में गोचर करने के कारण आगजनी की घटनाओं को काफी बढ़ा रहा है।

● शनि ग्रह- ज्योतिष में शनि और मंगल की शत्रुता देखने को मिलती है। शनि की अशुभ स्थिति होने पर यह तेल, पेट्रोल या कोयले की डिपो में भीषण आगजनी की दुर्घटनायें कराता है साथ ही इससे बिजली, वायरिंग, मशीन, फैक्ट्री, सिस्टम में खराबी भी देखने को मिल सकती है। वर्तमान समय में शनि से मंगल ग्रह मारक यानि द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है। इससे भी इस प्रकार की घटनाएं बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं।
● सूर्य ग्रह- यह ब्रह्मांड में अत्यधिक गर्मी और तपन का कारक है। इसके कारण आगजनी के अनुकूल माहौल बनता है और आगजनी की दुर्घटनाएं भी देखने को मिलती हैं। 15 जून को जब सूर्यदेव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे तो राहु से पूर्ण दृष्ट होने के कारण फिर से गर्मी के प्रकोप को बढ़ा देंगे। जून माह के लास्ट तक गर्मी और आगजनी की घटनाओं में कमी आना शुरू हो जाएगी।

✍️डॉ.योगेश व्यास, ज्योतिषाचार्य, टापर,
👉(कुण्डली, अंक ज्योतिष & वास्तु एक्सपर्ट),
🏹 नेट (ज्योतिष शास्त्र & संस्कृत)
🛎️ पीएचडी (ज्योतिष शास्त्र)
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