बीकानेर, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राजस्थानी भाषा की संपन्नता पर जोर देते हुए कहा कि हमारी ‘मायड़ भाषा’ का साहित्य और संस्कृति विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान रखती है। उन्होंने आह्वान किया कि राजस्थानी भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार और इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए अधिक गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है।
‘जागती जोत’ के विशेषांकों का विमोचन और अवलोकन
शुक्रवार को बीकानेर ट्रेड फेयर एक्सपो परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की प्रसिद्ध मुखपत्रिका ‘जागती जोत’ के सद्य प्रकाशित अंकों का अवलोकन किया। इस दौरान दो महत्वपूर्ण विशेषांकों की विशेष चर्चा रही:
- ‘राजस्थानी गद्य साहित्य री समालोचना’
- ‘डॉ. नृसिंह राजपुरोहित विशेषांक’
मेघवाल ने अकादमी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थानी में उत्कृष्ट साहित्य का सृजन हो रहा है, जो समाज को सही दिशा देने का कार्य करता है।
अकादमी की गतिविधियों पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान अकादमी सचिव शरद केवलिया ने केंद्रीय मंत्री को संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों और योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं, ‘जागती जोत’ के संपादक मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने पत्रिका के आगामी अंकों की रूपरेखा प्रस्तुत की और बताया कि किस प्रकार यह पत्रिका राजस्थानी लेखकों को एक सशक्त मंच प्रदान कर रही है।
इस अवसर पर स्थानीय साहित्यकार, गणमान्य नागरिक और भाषा प्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने और इसके प्रचार-प्रसार के संकल्प को दोहराया।

