ऑनलाइन धमकी और खौफ दिखाकर 7.22 लाख की ठगी, जयपुर SOG से अजमेर साइबर थाने पहुंची FIR

अजमेर। राजस्थान में पैर पसार रहे साइबर अपराधियों ने अब अजमेर में एक शख्स को ऑनलाइन धमकी और कानूनी कार्रवाई का खौफ दिखाकर लाखों रुपए की चपत लगा दी है। अज्ञात साइबर ठगों ने पीड़ित को इस कदर डराया कि उसने बिना सोचे-समझे 7 लाख 22 हजार 350 रुपए ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।

इस हाई-प्रोफाइल ठगी के बाद पीड़ित की शिकायत पर जयपुर एटीएस-एसओजी (ATS-SOG) के साइबर क्राइम थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसे अब जांच के लिए आधिकारिक रूप से साइबर थाना अजमेर ट्रांसफर कर दिया गया है।

जानिए कैसे हुई वारदात और कैसे अजमेर पहुंची FIR

पीड़ित लक्ष्मी नारायण ने इस ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होने के बाद तुरंत केंद्र सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। मामला बेहद गंभीर होने और तकनीकी तफ्तीश की जरूरत को देखते हुए सबसे पहले साइबर पुलिस थाना एटीएस-एसओजी, जयपुर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज की गई।

चूंकि घटना का मुख्य क्षेत्राधिकार अजमेर जिला था, इसलिए जयपुर एसओजी ने इस जीरो एफआईआर को मूल पत्रावली के साथ साइबर अपराध थाना, अजमेर को सुपुर्द कर दिया। अजमेर साइबर पुलिस ने जब मामले की प्राथमिक स्क्रूटनी की, तो पाया कि यह मामला गंभीर रूप से डराने-धमकाने और धोखाधड़ी का है। इसके बाद अजमेर थाने में बीएनएस की धारा 308(2) और 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की गई।

ट्रांजेक्शन खंगालने में जुटी पुलिस, हेड कांस्टेबल को मिली कमान

अजमेर साइबर थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए जाल बिछाना शुरू कर दिया है।

  • जांच अधिकारी: मामले की तकनीकी और फील्ड इन्वेस्टिगेशन की जिम्मेदारी हेड कांस्टेबल रामदयाल (बेल्ट नंबर 593) को सौंपी गई है।
  • फोकस एरिया: पुलिस की साइबर टीम सबसे पहले उस बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट के ट्रांजेक्शन ट्रेल (पैसे के लेन-देन का रास्ता) को खंगाल रही है, जिसमें पीड़ित ने पैसे ट्रांसफर किए थे। इसके जरिए ठगों के मुख्य ठिकाने और उनकी लोकेशन को ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है।

साइबर एक्सपर्ट्स की राय: ऐसे “डिजिटल अरेस्ट” और धमकियों से बचें

“आजकल ठग सीबीआई, पुलिस, कस्टम या नारकोटिक्स अधिकारी बनकर लोगों को वीडियो कॉल या ऑडियो कॉल पर डराते हैं कि आपके नाम से कोई अवैध पार्सल आया है या गैर-कानूनी काम हुआ है। कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे नहीं मांगती। डरने के बजाय तुरंत 1930 पर कॉल करें।” — साइबर एक्सपर्ट सेल, राजस्थान

अजमेर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाली धमकी भरी कॉल या खुद को अधिकारी बताने वाले व्यक्ति के झांसे में न आएं और अपनी मेहनत की कमाई को ठगों के हवाले करने से बचें। यदि ऐसा कोई संदेहास्पद वाकया होता है, तो तुरंत नजदीकी थाने या साइबर हेल्प डेस्क को सूचित करें।


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