बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर जिले के कोलायत क्षेत्र से भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां चानी गांव में सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर 5 साल तक एक अवैध नाका चलाया गया। इस नाके के जरिए खनिज ढोने वाले वाहनों से करोड़ों रुपये की वसूली की गई, जिसे सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय डकार लिया गया।
लोकायुक्त के निर्देश पर हुई उच्च स्तरीय जांच में गबन की पुष्टि होने के बाद, जिला परिषद ने कड़ा रुख अपनाते हुए वर्तमान में लूणकरणसर में कार्यरत तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी उदयभान यादव को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
5 साल तक खनिज वाहनों से ‘अवैध’ वसूली
जांच में सामने आया कि वर्ष 2015 से 2020 के बीच कोलायत के चानी गांव में पंचायत की ओर से अवैध रूप से नाका लगाया गया था। आमतौर पर खनिज वाहनों से रॉयल्टी वसूलने का ठेका खान विभाग द्वारा बिड के जरिए दिया जाता है, लेकिन यहां सरपंच और वीडीओ ने मिलीभगत कर निजी आय बढ़ाने के लिए अपना ही नाका खड़ा कर दिया। इस दौरान वहां से गुजरने वाले क्ले, बजरी और सिलिका सैंड के वाहनों से करोड़ों रुपये वसूले गए।
करोड़ों का गबन: रसीदें मिलीं पर पैसा गायब
जांच कमेटी ने जब पंचायत के रिकॉर्ड खंगाले तो भ्रष्टाचार की परतें उधड़ती चली गईं:
- आय का अंतर: रिकॉर्ड के अनुसार रसीद बुकों से 2.13 करोड़ रुपये की आय होना सामने आया, लेकिन ग्राम पंचायत की रोकड़ बही (Cash Book) में मात्र 1.82 करोड़ रुपये ही दर्ज मिले।
- सीधा गबन: करीब 31 लाख रुपये का कोई हिसाब नहीं मिला, जो सीधे तौर पर गबन की श्रेणी में आता है।
- लापता वाउचर: खर्च के नाम पर भी बड़ा खेल हुआ। 1.82 करोड़ रुपये के पेटे मात्र 56 लाख रुपये के वाउचर पेश किए गए, जबकि 1.26 करोड़ रुपये के वाउचर गायब मिले।
एसीबी (ACB) के रडार पर कई अधिकारी
जिला परिषद अब इस पूरे गबन मामले की रिपोर्ट भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को सौंपने की तैयारी कर रही है। बर्खास्त वीडीओ उदयभान यादव के अलावा, चानी गांव में उस दौरान तैनात रहे दो रिटायर्ड ग्राम विकास अधिकारी— गोविंद सिंह और जयकरण सिंह भी अब जांच के दायरे में हैं। तत्कालीन सरपंच मनोहर सिंह के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की तैयारी कर ली गई है।
“लोकायुक्त के निर्देश पर हुई जांच में तत्कालीन सरपंच और वीडीओ को दोषी माना गया है। ग्राम विकास अधिकारी उदयभान को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है और अब मामले की एसीबी से गहन जांच कराई जाएगी।” — सोहनलाल, सीईओ, जिला परिषद
