उदयपुर। उदयपुर के विश्वप्रसिद्ध सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) को संरक्षित करने के तमाम दावों की पोल खुल गई है। ‘Expose Now’ द्वारा उजागर किए गए सज्जनगढ़ लैंड स्कैम मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। इस पूरे फर्जीवाड़े की गूंज अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों को अब पीएमओ की कार्रवाई का भी डर नहीं सता रहा है।
PMO के निर्देश भी बेअसर, जांच में लीपापोती जारी
सज्जनगढ़ ईको-सेंसिटिव जोन में करीब 300 करोड़ रुपये के इस महाघोटाले और नियमों को ताक पर रखकर बनाए जा रहे अवैध रिसॉर्ट की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची थी। पीएमओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उदयपुर कलेक्टर और प्रधान मुख्य वन संरक्षक को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। विभागीय अधिकारी दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय साक्ष्यों को छुपाने और अवैध निर्माण को संरक्षण देने में जुटे हैं।
दूरी के आंकड़ों में हेरफेर कर हासिल किया ‘फर्जी’ पट्टा
नियमों के मुताबिक, ईको-सेंसिटिव जोन की एक किलोमीटर की परिधि में किसी भी प्रकार का व्यावसायिक निर्माण पूरी तरह वर्जित है। लेकिन ‘Expose Now’ के खुलासे के अनुसार, उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) और वन विभाग के अधिकारियों ने मिलीभगत कर कालारोही गांव की आराजी संख्या 3347-3350, 3333, 1391 व 1399 की मौका रिपोर्ट में हेराफेरी की। जो जमीन प्रतिबंधित दायरे में थी, उसे कागजों में 1050 मीटर दूर दिखा दिया गया। इसी झूठी रिपोर्ट के आधार पर रिसॉर्ट निर्माण की स्वीकृति जारी कर दी गई।
2 मंजिल की अनुमति पर खड़ी कर दी 4 मंजिला इमारत
भ्रष्टाचार का आलम यह है कि नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ निर्माण अनुमति की भी धज्जियां उड़ाई गई हैं:
- ऊंचाई का उल्लंघन: UDA ने केवल 2 मंजिल (G+2) की अनुमति दी थी, लेकिन मौके पर 4 मंजिला (G+4) विशालकाय इमारत खड़ी कर दी गई है।
- क्षेत्रफल का उल्लंघन: अनुमति मात्र 96,000 वर्ग फीट के निर्माण की थी, जबकि रिसॉर्ट मालिक ने अधिकारियों की नाक के नीचे 4 लाख वर्ग फीट से अधिक का पक्का निर्माण कर लिया है।
नियमों की धज्जियां: एक नजर में (तुलनात्मक विवरण)
| मानक | नियम (ESZ) | मौके की स्थिति | उल्लंघन की स्थिति |
| ग्राउंड कवरेज | अधिकतम 20% (52,000 ft) | 75% (1,50,000 ft) | 300% से ज्यादा उल्लंघन |
| कुल निर्माण | 96,000 sq. ft | 4,00,000 sq. ft | विशालकाय अतिक्रमण |
| ऊंचाई/मंजिल | G + 2 (दो मंजिल) | G + 4 (चार मंजिल) | नियमों के विरुद्ध |
| हरियाली क्षेत्र | 80% अनिवार्य | मात्र 15% शेष | पर्यावरण का भारी विनाश |
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना
कालारोही की इस विवादित भूमि पर चल रहा निर्माण न केवल पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह माननीय सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों की भी सीधी अवहेलना है जो ईको-सेंसिटिव जोन के संरक्षण के लिए दिए गए थे। ‘Expose Now’ द्वारा इस स्कैम को बेनकाब किए जाने के बाद अब जनता की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद इस ‘सफेद हाथी’ (अवैध निर्माण) पर बुलडोजर चलेगा या भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा?
