एसीबी का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 1 लाख की घूस लेते सरपंच रंगे हाथों गिरफ्तार; धरोहर राशि लौटाने के बदले मांगा था ‘कमीशन’

By Admin

सांचौर चौराहे पर बिछाया जाल: राज संपर्क पोर्टल पर शिकायत के बाद भी नहीं पसीजा दिल, 2 लाख की अमानत राशि पर मांगी 50% हिस्सेदारी…

परबतसर का सांचौर चौराहा… शाम का वक्त और वाहनों का शोर। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन भीड़ के बीच एक गाड़ी के पास भ्रष्टाचार की ‘डीलिंग’ अपने अंतिम चरण में थी। सरपंच साहब को पूरा भरोसा था कि उनकी ‘पावर’ के आगे कोई नहीं बोलेगा और गुलाबी नोटों की गड्डी उनकी जेब में आने वाली है। लेकिन, जैसे ही रिश्वत की रकम हाथ बदली, मंजर पलक झपकते ही बदल गया। सादी वर्दी में तैनात एसीबी के जांबाजों ने झपट्टा मारा और ‘साहब’ कानून की गिरफ्त में थे। यह दृश्य था उस कार्रवाई का, जिसने डीडवाना-कुचामन जिले के भ्रष्ट तंत्र में खलबली मचा दी है।

प्रशासक की कुर्सी पर ‘दाग’

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) जयपुर ग्रामीण की टीम ने यह बड़ी कार्रवाई अंजाम दी है। टीम ने ग्राम पंचायत बाजवास (पंचायत समिति परबतसर) के प्रशासक एवं सरपंच राजेन्द्र प्रसाद मोयल को गिरफ्तार किया है। सरपंच को पूरे 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचा गया। यह कार्रवाई एसीबी के उपमहानिरीक्षक पुलिस अनिल कयाल के सुपरविजन में और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनील सियाग के निर्देशन में की गई।

ईमानदारी का ‘जुर्माना’ मामले की जड़ में एक टेंडर प्रक्रिया थी। एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, परिवादी को वर्ष 2024-25 में ग्राम पंचायत बाजवास में निर्माण सामग्री सप्लाई का टेंडर मिला था। उसने ईमानदारी से काम पूरा किया और सप्लाई दी। काम खत्म होने के बाद नियमनुसार उसकी 2 लाख रुपये की धरोहर राशि (Security Deposit) पंचायत में जमा थी। परिवादी ने कई बार चक्कर काटे, आवेदन दिए और रिमांडर भेजे, लेकिन उसकी अपनी ही गाढ़ी कमाई उसे वापस नहीं मिल रही थी।

पोर्टल की शिकायत और सरपंच की ‘खुन्नस’ थक-हारकर परिवादी ने ‘राज संपर्क पोर्टल’ पर शिकायत दर्ज करवाई। सरकारी दबाव के बाद 27 जनवरी 2026 को उसकी धरोहर राशि तो लौटा दी गई, लेकिन सरपंच राजेन्द प्रसाद ने इसे अपनी तौहीन मान लिया। राशि लौटाने के बाद सरपंच ने परिवादी से संपर्क किया और इस काम की एवज में 1 लाख रुपये की अवैध रिश्वत (कमीशन) की मांग कर डाली। यानी, परिवादी का अपना ही पैसा वापस मिलने पर उसे आधा पैसा रिश्वत में देना पड़ रहा था।

जाल बिछा और फंसा शिकारी परिवादी ने एसीबी में शिकायत दी, जिसका 5 फरवरी 2026 को सत्यापन कराया गया। रिश्वत मांगने की पुष्टि होते ही एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई। तय प्लान के मुताबिक, परिवादी रिश्वत की रकम लेकर सांचौर चौराहे (थाना परबतसर क्षेत्र) पहुंचा। जैसे ही आरोपी सरपंच ने नोटों को हाथ लगाया, पहले से मुस्तैद एसीबी टीम ने उसे घेर लिया और मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

सिस्टम में हड़कंप, पूछताछ जारी इस कार्रवाई के बाद परबतसर से लेकर जयपुर ग्रामीण तक के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। एसीबी ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और उससे गहन पूछताछ जारी है। एसीबी ने साफ संदेश दिया है कि सरकारी योजनाओं में जनता को परेशान करने वाले और रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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