जयपुर के थानों में शुरू हुई NAFIS की स्कैनिंग मशीनें, अब चांस प्रिंट का राष्ट्रीय डेटाबेस में होगा सर्च; फिंगरप्रिंट स्लिप लेकर दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं
जयपुर। अपराध स्थल पर मिले उंगलियों के निशान अब पुलिस के लिए महज एक सुराग नहीं, बल्कि अपराधी तक पहुंचने का ऐसा डिजिटल हथियार बनते जा रहे हैं, जिसकी पहुंच देश की सीमाओं तक है। जयपुर पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ जांच को और तेज करने के लिए थानों में नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) की स्कैनिंग मशीनें लगाना शुरू कर दिया है।

अब किसी वारदात के बाद मौके से मिले फिंगरप्रिंट का मिलान सिर्फ जयपुर या राजस्थान के रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि देश के किसी भी हिस्से में दर्ज अपराधी के फिंगरप्रिंट से किया जा सकेगा। इस तकनीक के थानों तक पहुंचने से जांच की पारंपरिक प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है। पहले अपराध स्थल से मिले फिंगरप्रिंट की स्लिप तैयार कर उसे संबंधित फिंगरप्रिंट यूनिट, जिला एसपी या डीसीपी कार्यालय तक भेजना पड़ता था। इसके बाद रिपोर्ट का इंतजार किया जाता था। अब अधिकृत पुलिसकर्मी थाने में उपलब्ध स्कैनिंग सुविधा के जरिए फिंगरप्रिंट को सीधे डिजिटल माध्यम से NAFIS पर सर्च कर सकेंगे।

जयपुर में मिला प्रिंट, रिकॉर्ड बिहार-बंगाल या हरियाणा में भी हो सकता है
मान लीजिए जयपुर में चोरी, नकबजनी या किसी गंभीर अपराध के दौरान आरोपी ने मौके पर अपनी उंगली का निशान छोड़ दिया। जांच में मिले इस ‘चांस प्रिंट’ का स्थानीय रिकॉर्ड में कोई मिलान नहीं मिलता। अब पुलिस इसे NAFIS में सर्च कर सकती है। यदि यही व्यक्ति पहले हरियाणा, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली या देश के किसी अन्य हिस्से में गिरफ्तार हुआ है और उसका फिंगरप्रिंट डेटाबेस में दर्ज है, तो तकनीक उस रिकॉर्ड से संभावित मिलान सामने ला सकती है। यानी आरोपी ने भले ही दूसरे राज्य में अपराध किया हो और जयपुर पुलिस के रिकॉर्ड में उसका नाम कभी नहीं आया हो, लेकिन उसकी उंगलियों के निशान उसकी पुरानी आपराधिक पहचान का रास्ता खोल सकते हैं।
एक फिंगरप्रिंट…और खुल सकता है अपराधों का पूरा रिकॉर्ड
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ओर से लागू NAFIS अपराधियों के फिंगरप्रिंट और पाम प्रिंट का देशव्यापी डेटाबेस है। इसमें किसी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट दर्ज होने पर उसे 10 अंकों का यूनिक नेशनल फिंगरप्रिंट नंबर (NFN) दिया जाता है। यह पहचान उसके फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड से जुड़ी रहती है और अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों की जांच में बायोमेट्रिक मिलान उपयोगी साबित हो सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन मामलों में है, जिनमें वारदात करने वाला आरोपी स्थानीय पुलिस के लिए बिल्कुल नया होता है। अपराध स्थल से मिले चांस प्रिंट को राष्ट्रीय डेटाबेस में खोजने पर उसके किसी पुराने रिकॉर्ड से कड़ी जुड़ सकती है।

दिल्ली की चोरी में राजस्थान के आरोपी तक पहुंची पुलिस
NAFIS की उपयोगिता का उदाहरण NCRB की 2023 की ‘फिंगर प्रिंट इंडिया’ रिपोर्ट में भी सामने आया है। पूर्वी दिल्ली में एक घर में चोरी के मामले में फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों ने दो अलमारियों से ब्लैक पाउडर की मदद से तीन चांस प्रिंट विकसित किए। इन प्रिंट को NAFIS पर सर्च किया गया तो दो प्रिंट राजस्थान के एक आरोपी के दाएं अंगूठे और बाएं तर्जनी अंगुली से मैच हुए। जांच में सामने आया कि आरोपी को इससे पहले हरियाणा में गिरफ्तार किया जा चुका था। इस तरह दिल्ली में मिले फिंगरप्रिंट ने पुलिस को ऐसे आरोपी तक पहुंचने में मदद की, जिसका पुराना रिकॉर्ड दिल्ली में नहीं था।
अब मौके पर ही डिजिटल फिंगरप्रिंट की तैयारी
NAFIS को थानों तक पहुंचाने के साथ जांच में इस्तेमाल होने वाले पोर्टेबल लाइव-स्कैन डिवाइस भी महत्वपूर्ण साबित होंगे। इनके जरिए मौके पर ही फिंगरप्रिंट को डिजिटल रूप में दर्ज किया जा सकता है। इससे पारंपरिक तरीके से फिंगरप्रिंट स्लिप तैयार करने, उसे दूसरे कार्यालय तक भेजने और रिपोर्ट आने का इंतजार करने की जरूरत कम होगी। राजस्थान में अब तक NAFIS की स्कैनिंग सुविधा मुख्य रूप से जिला एसपी कार्यालय, डीसीपी कार्यालय और विशेष फिंगरप्रिंट यूनिटों में उपलब्ध थी। कुछ दिन पहले जारी आदेश के बाद इसे पुलिस थानों से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जयपुर के कुछ थानों में इसका इस्तेमाल भी शुरू हो चुका है, जबकि अन्य थानों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
अपराधी के लिए सबसे बड़ा खतरा—उसकी उंगलियों के निशान

पुलिस जांच में आरोपी अपना नाम, पता, पहचान और मोबाइल बदल सकता है, लेकिन फिंगरप्रिंट बदलना संभव नहीं है। यही वजह है कि NAFIS जैसी बायोमेट्रिक तकनीक अपराध की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अब अपराध स्थल से उठने वाला एक छोटा-सा फिंगरप्रिंट भी पुलिस को देश के किसी दूसरे हिस्से में दर्ज पुराने अपराध तक पहुंचाने वाली कड़ी बन सकता है।
थानों तक NAFIS की पहुंच बढ़ने के साथ पुलिस की जांच स्थानीय रिकॉर्ड से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के डिजिटल फिंगरप्रिंट नेटवर्क से सीधे जुड़ रही है। आने वाले समय में नकबजनी, चोरी, लूट और अन्य अपराधों में मौके से मिले चांस प्रिंट की तत्काल डिजिटल जांच आरोपियों की पहचान और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड तक पहुंचने में अहम भूमिका निभा सकती है।