-विश्वेंद्र सिंह के पास 11 तो राजेंद्र राठौड़ और कृष्णा पूनियां के पास 6-6 सुरक्षाकर्मी, कुर्सी जाने के बाद भी शाही लवाजमा बरकरार
-दिव्या मदेरणा, रघु शर्मा समेत 19 पूर्व विधायकों और 5 पूर्व अफसरों के ठाठ पर टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई लुटा रही सरकार
-पुरानी घटनाओं और अनाम फोन कॉल्स की आड़ में बांटी गई सुरक्षा, महकमे की रिपोर्ट में खुली लापरवाही
जयपुर। राज्य में पूर्व जन-प्रतिनिधियों और सेवानिवृत्त नौकरशाहों के ‘वीआईपी स्टेटस’ को बरकरार रखने के लिए सरकारी खजाने पर खुला डाका डाला जा रहा है। पद और सत्ता चले जाने के बावजूद इन पूर्व रसूखदारों का जलवा कम होने का नाम नहीं ले रहा। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के कुल 19 पूर्व विधायकों और 5 सेवानिवृत्त नौकरशाहों की खिदमत में 46 सरकारी सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। आम जनता की गाढ़ी कमाई से इन पूर्व रसूखदारों के दरवाजों पर हर साल करीब 4.89 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं।
विश्वेंद्र सिंह, कृष्णा पूनियां और राजेंद्र राठौड़ पर सबसे ज्यादा मेहरबानी:-
सुरक्षा बांटने का यह खेल पूरी तरह मनमाने ढंग से चलाया जा रहा है। पद से हटने के बाद भी पूर्व विधायक विश्वेंद्र सिंह की सुरक्षा में अकेले 11 सुरक्षाकर्मी (1-4 की गार्ड और 6 पीएसओ) तैनात किए गए हैं। वहीं, पूर्व विधायक कृष्णा पूनियां और राजेंद्र सिंह राठौड़ के पास 6-6 सुरक्षाकर्मियों (1-3 की गार्ड और 2 पीएसओ) का भारी-भरकम अमला लगा हुआ है। इन तीन ही हस्तियों के हिस्से में कुल 23 सुरक्षाकर्मी आते हैं, यानी आधी से ज्यादा सुरक्षा सिर्फ इन्हीं तीन चेहरों के रुतबे को बनाए रखने में लगी है।
लंबी है पूर्व विधायकों की फेहरिस्त: हर किसी को मिला सरकारी गनमैन
बिना किसी गंभीर खतरे के पूर्व माननीयों को सरकारी पीएसओ बांटे गए हैं। सूची के अनुसार:
-अभिनेष महर्षि और नाथूराम सिनोदिया के पास 2-2 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
-प्रेम सिंह बाजौर, ओम प्रकाश हुडला, बलजीत यादव, बलवान पूनियां, मंजीत धर्मपाल चौधरी, शकुन्तला रावत, गिर्राज सिंह मलिंगा, दिव्या मदेरणा, लाखन मीणा, नारायण बेनीवाल, रणधीर सिंह भिण्डर, धीरज गुर्जर, रघु शर्मा और सतीश पूनिया—इन सभी पूर्व विधायकों को 1-1 सरकारी सुरक्षाकर्मी देकर वीआईपी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
जनता के पैसे पर सुरक्षा का लाभ ले रहे 24 पूर्व रसूखदारों की पूरी सूची:-
क्र.सं. पूर्व विधायक / पूर्व नौकरशाह का नाम सुरक्षाकर्मियों की संख्या सुरक्षा का दर्ज आधार
| क्र.सं. | पूर्व विधायक / पूर्व नौकरशाह का नाम | सुरक्षाकर्मियों की संख्या | सुरक्षा का दर्ज आधार |
| 1. | कृष्णा पूनियां (पूर्व विधायक) | 6 (1-3 की गार्ड, 2 पीएसओ) | तर्जन (धमकी) |
| 2. | विश्वेन्द्र सिंह (पूर्व विधायक) | 11 (1-4 की गार्ड, 6 पीएसओ) | तर्जन |
| 3. | प्रेम सिंह बाजौर (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 4. | ओम प्रकाश हुडला (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 5. | अभिनेष महर्षि (पूर्व विधायक) | 2 | तर्जन |
| 6. | बलजीत यादव (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 7. | बलवान पूनियां (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 8. | मंजीत धर्मपाल चौधरी (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 9. | शकुन्तला रावत (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 10. | गिर्राज सिंह मलिंगा (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 11. | दिव्या मदेरणा (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 12. | लाखन मीणा (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 13. | नारायण बेनीवाल (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 14. | रणधीर सिंह भिण्डर (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 15. | धीरज गुर्जर (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 16. | रघु शर्मा (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 17. | नाथूराम सिनोदिया (पूर्व विधायक) | 2 | तर्जन |
| 18. | राजेन्द्र सिंह राठौड़ (पूर्व विधायक) | 6 (1-3 की गार्ड, 2 पीएसओ) | तर्जन |
| 19. | सतीश पूनिया (पूर्व विधायक) | 1 | तर्जन |
| 20. | मधुकर गुप्ता (सेवानिवृत्त आईएएस) | 1 | तर्जन |
| 21. | विद्या प्रकाश (सेनि. अति. पुलिस अधीक्षक) | 1 | तर्जन |
| 22. | रविप्रकाश मेहरड़ा (सेवानिवृत्त आईपीएस) | 1 | पदीय आधार |
| 23. | उमेश मिश्रा (पूर्व पुलिस महानिदेशक) | 1 | पदीय आधार |
| 24. | एम.एल. लाठर (पूर्व पुलिस महानिदेशक) | 1 | पदीय आधार |
(नोटः- इनमें से वर्तमान में सतीश पूनियां अब राज्य सभा सांसद बन गए हैं, वहीं बलजीत यादव जेल में हैं।)
सेवानिवृत्त नौकरशाह और पूर्व डीजीपी भी नहीं हैं पीछे:-
सरकारी खर्चे पर सुरक्षा का लाभ लेने वालों में केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि पूर्व अफसर भी शामिल हैं। सेवानिवृत्त आईएएस मधुकर गुप्ता और सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विद्या प्रकाश को ‘तर्जन’ के आधार पर 1-1 सुरक्षाकर्मी दिया गया है। वहीं, सेवानिवृत्त आईपीएस रविप्रकाश मेहरड़ा, पूर्व डीजीपी उमेश मिश्रा और पूर्व डीजीपी एम.एल. लाठर को ‘पदीय आधार’ बताकर 1-1 सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराया गया है।
दिखावे का हथियार, थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट में खुली तंत्र की ढिलाई:-
सुरक्षा महकमे के आंतरिक परिपत्र ने इस पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य विशेष शाखा के अनुसार, अधिकांश मामलों में सुरक्षा देने का कोई ठोस या व्यावहारिक आधार ही नहीं है। केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, क्षेत्र में अधिक भ्रमण, दूसरे राज्यों के दौरों या ‘पूर्व में किसी पद पर रहने’ जैसी सामान्य बातों को आधार बनाकर सुरक्षा की अनुशंसा की गई। इसके अलावा, सालों पुराने दर्ज मामलों और बिना गहन जांच वाले धमकी भरे फोन कॉल्स को ढाल बनाकर सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए। आम जनता सुरक्षा के अभाव से जूझती है, जबकि इन 24 पूर्व चेहरों के पीछे सालाना 4.89 करोड़ का सरकारी खर्च बदस्तूर जारी है।
जनता बेहाल, तंत्र लाचार, कब थमेगी यह फिजूलखर्ची:-
एक तरफ राज्य के थानों में जाब्ते की भारी किल्लत है, आम नागरिक अपनी छोटी-मोटी शिकायतों और सुरक्षा की गुहार लेकर चौखट-चौखट भटकने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ रसूखदारों के निजी ठाठ और सामाजिक आयोजनों में जलवा बिखेरने के लिए खाकी को ‘निजी अर्दली’ की तरह तैनात कर दिया गया है। जब सुरक्षा महकमा खुद यह स्वीकार कर चुका है कि सालों पुरानी घटनाओं, बेबुनियाद फोन कॉल्स और महज राजनीतिक रंजिशों के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर सुरक्षा बांटी जा रही है, तो सवाल उठता है कि इस वीआईपी कल्चर पर पूर्ण विराम कब लगेगा? क्या जनता के खून-पसीने के टैक्स से हर साल लुटाए जा रहे ₹4.89 करोड़ का कोई हिसाब होगा, या फिर ‘साहबों’ और ‘पूर्व माननीयों’ का यह शाही जलवा यूं ही बदस्तूर जारी रहेगा? अब गेंद सरकार और गृह विभाग के पाले में है कि वह जनता की गाढ़ी कमाई की हिफाजत करती है या पूर्व रसूखदारों के इस फर्जी स्टेटस सिंबल को आगे भी पालती रहती है।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now