जयपुर/बाड़मेर। पचपदरा तहसील क्षेत्र में जिप्सम खनन को लेकर बड़ी कार्यवाही की गई है। खान विभाग की ओर से जारी आदेश में कुल 36 जिप्सम परमिट निरस्त किए गए हैं। निरस्त परमिटों में भीमरलाई के 13, वजावास के 12, खार की ढाणी के 3, मेकरना के 3, भीमरलाई गांव के 3, सिनली जागीर का 1 और रिकरलाई का 1 परमिट शामिल है। सूची में कई परमिट 4 से 5 हेक्टेयर तक के भी हैं और सर्वाधिक 5 हेक्टेयर क्षेत्र वाले परमिट भी शामिल हैं।
3 मीटर की अनुमति, मौके पर 16-17 मीटर तक खनन
मामले को लेकर सिनली जागीर निवासी सुमेर लाल शर्मा द्वारा खान विभाग में शिकायत की गई थी। शिकायत में जिप्सम परमिटों की आड़ में निर्धारित 3 मीटर की सीमा से अधिक गहराई तक खनन किए जाने का मुद्दा उठाया गया था।
मामले में दूदवा के तत्कालीन उप तहसीलदार श्री मंगलाराम की मौका रिपोर्ट के अनुसार मौके पर 16-17 मीटर तक अवैध खनन होने की बात पुष्टि हुई थी, जबकि निर्धारित अनुमति सीमा केवल 3 मीटर की गहराई तक ही होती है। यानी स्वीकृत तीन मीटर से पाँच गुना से भी अधिक गहराई तक अवैध खनन किया गया है।
खान विभाग ने 31 परमिट धारकों को नोटिस दिए
मामले में खान विभाग बाड़मेर की ओर से भी कार्यवाही की गई है। ख़ान विभाग बाड़मेर द्वारा 31 जिप्सम परमिट धारकों को 3 मीटर से अधिक गहराई तक खनन करने के कारण नोटिस भी जारी किए गए हैं। इसके बाद मामला केवल स्थानीय स्तर की शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अतिरिक्त खनिज निदेशक(सतर्कता), उदयपुर धर्मेन्द्र लोहार ने भी मौके का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान 13 परमिटों में अवैध खनन पाए जाने पर इस संबंध में बाड़मेर खान विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए भी लिखा गया था।
हाईकोर्ट में भी मामला विचाराधीन
खेत सुधार के लिए ख़ान विभाग द्वारा जारी जिप्सम परमिटों की आड़ में जिप्सम खनन में भारी अनियमितताओं और अवैध खनन के इसी व्यापक मामले को लेकर सुमेर लाल शर्मा बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान नाम से राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी विचाराधीन है।
अब 36 जिप्सम परमिटों के निरस्तीकरण की सूची सामने आने के बाद यह कार्रवाई क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। खास बात यह है कि मामला केवल परमिट निरस्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्धारित 3 मीटर की सीमा के बजाय 16-17 मीटर तक अवैध खनन की रिपोर्ट, 31 परमिट धारकों को नोटिस और 13 लीजों में अवैध खनन पाए जाने की सतर्कता जांच जैसे बिंदु पूरे प्रकरण में अवैध खनन और ख़ान विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता भी साबित हो रही है क्योंकि नियमानुसार जहाँ सतह से 3 मीटर से ज़्यादा गहराई पर जिप्सम मौजूद हो, वहाँ जिप्सम परमिट जारी ही नहीं किए जा सकते हैं। लेकिन ख़ान विभाग द्वारा जारी नोटिसों में ख़ान विभाग ने ही माना है कि परमिट धारकों द्वारा 3 ओर 4 मीटर से ज़्यादा गहराई पर जिप्सम का अवैध खनन करना पाया गया है। इसका अर्थ ये है कि ख़ान विभाग द्वारा जाँच करने के बावजूद भी 3 मीटर से ज़्यादा गहराई पर मौजूद जिप्सम वाले स्थानों पर भी ग़ैर क़ानूनी रूप से जिप्सम परमिट जारी किए गए हैं और जिप्सम परमिटों का इस्तेमाल लीज की तरह किया गया है और मजे की बात यह भी है कि नोटिस जारी करने के बाद भी उन्ही परमिट धारकों को उन्ही परमिटों पर जिप्सम परिवहन करने के हजारों ई-रवन्ना भी ख़ान विभाग बाड़मेर द्वारा जारी कर हज़ारों ट्रक जिप्सम का अवैध खनन और अवैध परिवहन करवा दिया गया हैं, जिससे किसानों की भूमि बर्बाद प्राय: हो चुकी है।
36 परमिटों का निरस्तीकरण यह सवाल भी खड़ा करता है कि इन परमिटों में निर्धारित सीमा से अधिक खनन कब से और कितने क्षेत्र में होता रहा तथा इससे सरकारी राजस्व और पर्यावरण को कितना नुकसान हुआ। कितने किसानों की भूमि सदैव के लिए बर्बाद और बंजर की जा चुकी है ? सुमेर लाल शर्मा ने बताया कि दूदवा क्षेत्र में में बड़ी-बड़ी जिप्सम खदानों को कागज़ों में केवल खेत सुधार के नाम पर छोटे-छोटे जिप्सम परमिट के रूप में दर्शा कर अरबों रुपए के जिप्सम का अवैध खनन और परिवहन देश की बड़ी सीमेंट कंपनियों को सप्लाई किया गया हैं। अब कार्यवाही के साथ-साथ अवैध खनन से हुए नुकसान की वसूली और जिम्मेदार लोगों पर कार्यवाही करने की आगे की कार्यवाही अमल में लायी जाएगी ।