राजस्थान ट्रांसफर लिस्ट पर बड़ी गफलत: राजस्व मंडल और विभाग के अलग-अलग आदेशों से मचा हड़कंप

जयपुर: राजस्थान राजस्व विभाग में इन दिनों तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के स्थानांतरण को लेकर एक अजीबोगरीब स्थिति बनी हुई है। हाल ही में जारी हुई तबादला सूची को लेकर प्रशासन के भीतर ही भारी गफलत देखने को मिली, जिसके चलते सरकार को आनन-फानन में राजस्व मंडल द्वारा जारी की गई सूची पर रोक लगानी पड़ी।

क्या थी पूरी गफलत?

यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक ही दिन में दो अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों—राजस्व मंडल (अजमेर) और राज्य राजस्व विभाग (जयपुर)—ने तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के तबादलों के लिए अलग-अलग सूचियां जारी कर दीं। इस अप्रत्याशित कदम से न केवल अधिकारियों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई, बल्कि जिला स्तर पर प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई।

157 बनाम 164 का अंतर दोनों सूचियों में भारी विरोधाभास था, जिससे अधिकारियों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई। आंकड़ों पर गौर करें तो:

  • राजस्व मंडल की सूची: इसमें 157 तहसीलदार और 47 नायब तहसीलदारों के नाम शामिल थे।
  • राजस्व विभाग की सूची: इसमें 164 तहसीलदार और 49 नायब तहसीलदारों के स्थानांतरण के आदेश दिए गए।

इतना ही नहीं, दोनों सूचियों में कई अधिकारियों के नाम और उनके पदस्थापन स्थानों में भी बड़ा अंतर पाया गया। इससे सरकारी तंत्र में समन्वय के अभाव की पोल खुल गई।

आमजन पर सीधा असर

तहसीलदार और नायब तहसीलदार जिला प्रशासन की वह महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जो भूमि राजस्व, जाति/मूल निवास प्रमाण पत्र, नामांतरण और स्थानीय कानून-व्यवस्था जैसे जनता से जुड़े अहम कार्यों को देखते हैं। प्रशासनिक असमंजस के कारण तहसीलों में कामकाज ठप होने की नौबत आ गई थी, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

अब क्या है स्थिति?

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार के राजस्व विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए राजस्व मंडल द्वारा जारी की गई सूची को निरस्त/होल्ड पर रख दिया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अब केवल राजस्व विभाग द्वारा जारी की गई 164 तहसीलदार और 49 नायब तहसीलदार वाली सूची ही मान्य होगी। सभी जिला कलेक्टर्स को भी निर्देश दे दिए गए हैं कि वे केवल विभाग द्वारा अनुमोदित सूची के आधार पर ही कार्यभार ग्रहण करवाएं।

प्रशासनिक समन्वय पर उठे सवाल

इस घटना ने राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि तबादला सूची जैसे संवेदनशील मामले में उच्च स्तर पर सत्यापन और समन्वय की कमी के चलते ऐसा हुआ। हालांकि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित कर लिया है, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था की सुचिता पर एक प्रश्नचिह्न जरूर लगा दिया है।


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