Expose Now स्पेशल रिपोर्ट: बच्चों के दूध पर ‘कुंडली’ मारकर बैठे सरकारी अधिकारी, पन्नाधाय योजना में 15 जिलों के बच्चों को नहीं मिल रहा है दूध

-दावों की खुली पोल: 37.5 लाख किलो मांग के मुकाबले सिर्फ 41.90% दूध की सप्लाई, 21.82 लाख किलो का भारी टोटा

-3 महीने से फाइलों में दबा है आवंटन, दूध न पहुंचने पर शिक्षा विभाग ने डेयरी फेडरेशन (RCDF) पर उठाए सवाल

-राजधानी जयपुर में ही 22 फीसदी दूध की सप्लाई, उदयपुर, अलवर और बीकानेर जैसे बड़े जिलों में बच्चों की थाली से दूध पूरी तरह नदारद

जयपुर। राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले लाखों मासूम बच्चों की सेहत को सुधारने के लिए शुरू की गई ‘पन्नाधाय बाल गोपाल योजना’ विभागीय लापरवाही और सुस्त कार्यशैली के चलते पूरी तरह चरमरा गई है। प्रदेश के स्कूलों में बच्चों को सप्ताह में तय दिनों पर पौष्टिक दूध उपलब्ध कराने का जो सरकारी दावा किया गया था, जमीनी हकीकत में वह फाइलों और आंकड़ों के फेर में उलझ कर रह गया है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में स्वीकृत कुल 37,56,430 किलोग्राम पाउडर मिल्क की मांग के मुकाबले अब तक केवल 15,73,815 किलोग्राम (मात्र 41.90 प्रतिशत) दूध की ही सप्लाई हो पाई है।

आंकड़ों में योजना का सच, 58% दूध का कहीं अता-पता नहीं:-

राज्यभर में स्कूली बच्चों के लिए कुल 37,56,430 किलोग्राम पाउडर मिल्क की मांग स्वीकृत की गई थी। इसके उलट अब तक केवल 15,73,815 किलोग्राम (41.90%) दूध ही आवंटित और सप्लाई किया जा सका है। यानी करीब 58 फीसदी से ज्यादा (21.82 लाख किलोग्राम से अधिक) पाउडर मिल्क की आपूर्ति अब तक अटकी हुई है।

15 जिलों में पूरी तरह ‘ड्राई-आउट’, सप्लाई ‘शून्य’ पर अटकी

प्रदेश के 15 जिलों में स्थिति बेहद गंभीर है, जहां महीनों बीत जाने के बाद भी दूध की आपूर्ति का खाता तक नहीं खुल सका है:

-उदयपुर: 2.12 लाख किलोग्राम की भारी मांग, सप्लाई = शून्य

-बीकानेर: 1.28 लाख किलोग्राम की जरूरत, सप्लाई = शून्य

-अलवर: 1.08 लाख किलोग्राम की मांग, सप्लाई = शून्य

अन्य शून्य सप्लाई वाले जिले: भरतपुर, धौलपुर, बूंदी, नागौर, करौली, डीडवाना-कुचामन, जैसलमेर, बारां, कोटपूतली-बहरोड़, पाली, प्रतापगढ़ और खैरथल-तिजारा।

राजधानी जयपुर का हाल भी बदहाल है, जहां 3.58 लाख किलोग्राम की मांग के मुकाबले महज 22.60% दूध ही पहुंच सका। वहीं जोधपुर में 84.21% आपूर्ति दर्ज की गई है, जिससे यह साफ होता है कि आपूर्ति वितरण में भी कोई एकरूपता या ठोस निगरानी नहीं है।

शिक्षा विभाग ने जताई नाराजगी, पशुपालन एवं डेयरी विभाग से की मांग:-

योजना का आवंटन जारी हुए 3 महीने से अधिक का समय बीत चुका है। स्कूलों में दूध का पैकेट न पहुंचने पर स्कूल शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग को आधिकारिक पत्र भेजकर नाराजगी जताई है और ‘राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड’ (RCDF) के अधिकारियों को तुरंत आपूर्ति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी करने की मांग की है।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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